भोपाल,

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री द्वारा अध्यापक संवर्ग का शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा अपने आवास से 21 जनवरी को की थी.

एक माह से अधिक का लंबा समय हो गया है लेकिन शासन द्वारा अध्यापकों का शिक्षा विभाग में संविलियन की दिशा में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा है, जो चिन्ता का विषय है.

अध्यापक संघर्ष समिति मध्यप्रदेश संघ से बने दबाव कम नहीं होने देना चाहती है. इसलिये संघर्ष समिति एक्शन मूड में है. इसी तारतम्य में प्रत्येक जिले में संघर्ष समिति 22 फरवरी को शिक्षा विभाग में संविलियन अध्यापकों की मंशानुसार हो सके, इसलिये मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपेगी.

जिसमें प्रमुख मांग शिक्षाकर्मी, संविदा शाला शिक्षक, गुरुजी नियुक्ति दिनांक से शिक्षा विभाग में संविलियन, नियमित शिक्षक संवर्ग के समान पदनाम सहायक शिक्षक, व्याख्याता के पद पर तत्काल प्रभाव से आदेश हो, समान सेवा शर्तें लागू हों एवं समान सुविधायें लागू करने की होगी ताकि अध्यापक संवर्ग सही मायने में अधिकार सम्पन्न हो सकें एवं आपसी वरिष्ठïता भी बनी रह सके.

संघर्ष समिति सितंबर 2013 से मय एरियर्स छठवां वेतनमान एवं जनवरी 2016 से सातवां वेतनमान मय एरियर्स की अपनी चिर-परिचित मांग भी करती है. इसके बगैर संघर्ष समिति मुख्यमंत्री की घोषणा ‘आज से सब शिक्षक कहलायेंगे’ एवं शिक्षा विभाग में संविलियन की घोषणा को धोखा मानते रहेंगे.

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