नवभारत न्यूज भोपाल,

अटल बिहारी वाजपेयी हिंंदी विश्वविद्यालय में संचालित मत्स्य विभाग में अब कम पढ़े लिखे छात्र छात्रा भी भाग ले पायेगे.

यह पाठयक्रम तीन माह के लिए संचालित होता है, जिसमें लगभग 15 से 20 प्रशिक्षु प्रत्येक सत्र में आवेदन करते हैं, आवेदकों की कम संख्या को देखते हुए,विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक में प्रवेश योग्यता की बांध्यता को समाप्त कर दिया गया है. पहले किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से बारहवी पास करने वाले छात्र ही इस कोर्स के लिए आवेदन कर सकते थे.

मछली पालन सिखाकर करते है आत्मनिर्भर- विश्वविद्यालय में 192 पाठ्यक्रम संचालित होते है, जिनमें तकनीकी शिक्षा के साथ साथ मछली पालन और मिट्टी के बर्तन बनाने सरीखे कोर्स शामिल है, जिनमें हुनरमंद को कौशल विकास योजना की तर्ज पर प्रशिक्षण दिया जाता है. मत्स्य विभाग के छात्रों को यहां मछली पालने के तरीके और उनके खान पान का प्रशिक्षण देकर उन्हे स्वयं के रोजगार सृजन के लिए प्रेरित किया जाता है.

मत्स्य विभाग में पहले बारहवी पास प्रशिक्षु ही प्रवेश ले पाते थे. जिसे विश्वविद्यालय कार्यपरिषद की बैठक में प्रास आदेश से योग्यता की बांध्यता से दूर कर दिया गया है. जिससे अब अधिक छात्र प्रशिक्षण ले पायेगे.
-एस के पारे कुलसचिव अटल बिहारी हिंदी विश्वविद्यालय

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