मुख्यमंत्री चौहान की नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. कुमार से मुलाकात

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में नीति आयोग के उपाध्यक्ष डॉ. राजीव कुमार से उनके कार्यालय में मुलाकात की. मुलाकात के दौरान चौहान ने उन्हें मध्यप्रदेश में किसानों के हितों को ध्यान में रखकर चलायी जा रही भावांतर भुगतान योजना के बारे में विस्तार से बताया. चौहान ने बताया कि मध्यप्रदेश में बम्पर कृषि पैदावार होने के कारण उत्पादों के दाम काफी गिर गये हैं.

इससे किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम नहीं मिल पा रहा था. इस समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार द्वारा भावांतर भुगतान योजना शुरू की गई. इस योजना के अंतर्गत किसानों को उनके कृषि उत्पाद की बाजार भाव और न्यूनतम समर्थन मूल्य के अंतर की राशि सीधे उनके बैंक खातों में जमा कर दी जाती है. अभी यह योजना खरीफ फसलों के लिये भी शुरू की गई है.

मुख्यमंत्री चौहान ने नीति आयोग के उपाध्यक्ष से आग्रह किया कि चना, मसूर और सरसों को भी न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने की व्यवस्था होना चाहिये. मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने 3 हजार किसानों के बेटा-बेटियों के लिए खाद्य प्रसंस्करण उद्योग लगवाने की शुरूआत की है. इससे युवाओं को अपने स्वयं के उद्योग लगाने के नये अवसर मिलेंगे.

लहसुन, प्याज की खरीदी भावांतर भुगतान में होगी, 31 मार्च तक होगा पंजीयन

भोपाल,

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का वाजिब मूल्य देने के लिए प्रतिबद्ध है.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना में लहसुन और प्याज की खरीदी की जाएगी, जबकि चना, मसूर और सरसों की उपज भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी जाएगी.

मंत्रालय में मीडिया से चर्चा करते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि भारत सरकार मुख्यमंत्री भावांतर भुगतान योजना पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए इसे देश के लिए लागू करने पर विचार कर रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पर विचार करने के लिए गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स का गठन किया है.

यह ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स भावांतर भुगतान योजना पर चर्चा कर इसे पूरे देश के लिए लागू करने का निर्णय लेगा. मुख्यमंत्री ने कहा कि इसलिए तय किया गया है कि चना, मसूर और सरसों की खरीदी समर्थन मूल्य पर की जाएगी. लहसुन और प्याज की खरीदी भावांतर भुगतान योजना के अंतर्गत होगी.

मुख्यमंत्री ने कहा कि सूखे के बावजूद इन फसलों का प्रदेश में बंपर उत्पादन हुआ है. राज्य सरकार किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है.

जिन किसानों ने भावान्तर भुगतान योजना में चना, सरसों और मसूर की फसलों के लिए अपना पंजीयन कराया है, उनका पंजीयन समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए वैध रहेगा. जो किसान पंजीयन कराने से छूट गए हैं, वे 31 मार्च तक अपना पंजीयन न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदी के लिए करवा सकते हैं. सरकार समर्थन मूल्य पर फसल खरीदने के लिए प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि 24 मार्च को शाम 7.00 बजे वे प्रदेश के किसानों को इस विषय पर संबोधित करेंगे.

उल्लेखनीय है कि भारत सरकार द्वारा चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 4400 रूपये प्रति क्विंटल, मसूर का 4250 रूपये प्रति क्विंटल और सरसों का 4000/- रूपये प्रति क्विंटल तय किया है.

अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि 27 अप्रैल तक बढ़ाने की मंजूरी

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में हुई मंत्रि-परिषद की बैठक में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों द्वारा खरीफ 2017 में वितरित अल्पकालीन फसल ऋण की देय तिथि 28 मार्च से बढ़ाकर 27 अप्रैल 2018 करने की मंजूरी दी गई.

मंत्रि-परिषद ने वर्ष 2017-18 में प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के माध्यम से शून्य प्रतिशत ब्याज दर पर अल्पावधि फसल ऋण देने की वर्तमान योजना के तहत सहकारी बैंकों के लिए बेस रेट पूर्व वर्षों की भांति 11 प्रतिशत यथावत रखने का निर्णय लिया.

मंत्रि-परिषद ने उच्च न्यायालय के ऐसे कर्मचारीगण, जो 3600 रूपये ग्रेड-पे के नीचे की ग्रेड-पे पर कार्य कर रहें हैं, उन्हें एक अप्रैल 2003 से एक अतिरिक्त वेतन वृद्धि और 3600 ग्रेड-पे प्राप्त करने वाले कर्मचारियों को दो अतिरिक्त वेतन वृद्धि देने की मंजूरी दी.

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