सरकारी कर्मियों की कार्यप्रणाली से नागरिक परेशान

नवभारत न्यूज गंजबासौदा,

अधिकारी कर्मचारियों की लापरवाही या अन्य कारणों के चलते आम जनता छोटी-छोटी समस्याओं को लेकर सरकारी महकमों के चक्कर लगाने मजबूर हैं.

आम अवाम की समस्याओं का निराकरण समय सीमा में अधिकारी नहीं कर पा रहे हैं. मंहगाई के इस दौर में गरीब मजदूर अपने परिवार का पालन पोषण करने मजदूरी करने जायें या सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगायें, इस ओर न तो जनप्रतिनिधि ध्यान दे रहे हैं और न जिले में बैठे आला अफसर. इसका खामियाजा आम जनता को भुगतना पड़ रहा है.

जनसुनवाई में भी समस्यायें यथावत

तहसील प्रांगण में होने वाले जनसुनवाई में सभी विभागों के कर्मचारियों के समक्ष आम जनता की जो शिकायतें पहुंचती हैं उनका मौके पर ही निराकरण होना चाहिये परंतु नहीं होता. जिस विभाग से त्रस्त होकर लोग जनसुनवाई कार्यक्रम में पहुंचते हैं, वे शिकायतें यथावत रहती हैं. फिर क्या औचित्य रहा इस तरह के कार्यक्रम आयोजित करने का? इससे जनसुनवाई कार्यक्रम गपशप कार्यक्रम बनकर रह गया है.

इस तरह के आरोप भुक्तभोगी आम जनता द्वारा अधिकारियों पर लगाये जा रहे हैं. कर्मचारियों, दफ्तरों के बाबूओं की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह उठ रहे हैं. शासन की जनकल्याण योजनाओं का गलत लोग लाभ उठा रहे हैं, पात्र गरीब सरकारी कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं. शासन की नीतियों का लाभ उन्हें नहीं मिल पा रहा है, उन्हें शिकायत करने के बाद भी न्याय नहीं मिल रहा है. इस स्थिति में पीडि़त फरियादी जायें तो जायें कहां?

भ्र्रष्टाचार से लोग परेशान

प्रधानमंत्री आवास योजना हो या मुख्यमंत्री की जनकल्याणकारी योजना, वे भ्रष्टाचार की बलि चढ़ रही है. कोई देखने सुनने वाला नहीं है. स्थानीय संस्थाओं की हालत किसी से छुपी नहीं है. सब जगह मौजा ही मौजा चल रहा है. आओ लाओ और जाओ यह सब चल रहा है, इससे आम जनता परेशान है.

महंगी पड़ेगी जनता की नाराजगी

लोगों के दिलों में अलाव की तरह अंदर ही अंदर नाराजगी की आग धधक रही है. ऊपर शांति अंदर अशांति की स्थिति बनी हुई है. लोगों का कहना है कि अभी समय है सत्तारूढ़ दल के पास बिगड़ी व्यवस्था को सुधारने का, आम जनता की ज्वलंत समस्याओं का निराकरण कराने का अन्यथा इसका खामियाजा आगामी चुनाव में भुगतना पड़ेगा.

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