मध्यप्रदेश सरकार शिक्षा के अधिकार के तहत इसे लागू करने में बड़े जोर-शोर से लगी हुई है. उसका ध्येय हर बसाहट-गांव तक प्राइमरी स्कूल को पहुंचाना है. इस अभियान के तहत 27,910 नये प्राइमरी स्कूल खोले गये हैं और 17,851 प्राइमरी स्कूलों का उन्नयन कर उन्हें मिडिल स्कूल बना दिया गया है.

इस समय पहले के व अब नये बने स्कूलों से मध्यप्रदेश में कुल प्राइमरी स्कूल 83,890 और 30,341 मिडिल स्कूल हो गये हैं. राज्य में स्कूलों के लिये भवनों के मामले में काफी कुछ किया जा रहा है. इनके 10,624 स्कूल भवन बनना है उनमें से काफी 9,209 बन चुके हैं और बाकी पर तेजी से काम चल रहा है.इस मामले में प्रगति भी उल्लेखनीय रही. प्राइमरी स्कूल में वृद्धि 50 प्रतिशत और मिडिल स्कूल 143 प्रतिशत बढ़े हैं.

राज्य में शिक्षकों के वेतनमानों तथा पद नामों को लेकर बहुत आंदोलन चले हैं. उन्हें अपनी मांगों के साथ-साथ इस बात पर भी केंद्रित होना चाहिए कि यह आमतौर पर देखने में आया है कि शिक्षक खासकर ग्रामीण स्कूलों में अक्सर गैरहाजिर रहते हैं और वेतन बराबर पूरा लेते हैं.

शिक्षकों के संगठन को सभी शिक्षकों को इस अनुशासन में लाना चाहिये कि वे नियमित रूप से स्कूल जायेंगे. यह भी बहुत खेद की बात है कि प्राइमरी में चौथी कक्षा के छात्र भी लिख-पढ़ नहीं सकते. पढ़ाई के नाम पर केवल खानापूर्ति की जाती है. प्राइमरी शिक्षा ही आगे की पढ़ाई की नींव है.