दुनिया में कम्प्यूटर युग आ ही गया है. लेकिन इससे परेशानियां भी आ गई हैं यह हैक हो जाता है, हैंग हो जाता है, क्रेश हो जाता है तब उसके प्रभाव से पूरा सिस्टम ही ठप्प हो जाता है. विकसित देशों में कम्प्यूटर साफ्टवेयर पूरी सक्रियता से काम कर रहा है.

लेकिन भारत वर्ष अभी इस ओर दौड़ तो लगाना चाहता है लेकिन यहां जो साफ्टवेयर बन रहे हैं उनमें कुछ ऐसा आ जाता है जो सहूलियत से ज्यादा मुसीबत लगने लगे हैं. जबसे देश में जी.एस.टी. लागू किया है और उसकी रिटर्न भरने की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी, हर दुकान तक जी.एस.टी. तो पहुंचा दी लेकिन अभी वहां तक साफ्टवेयर नहीं पहुंचे हैं.

व्यापारी वर्ग को सबसे ज्यादा परेशानी इस बात से हो रही है अक्सर यह होने लगा कि उसने ऑनलाइन रिटर्न तो भर दिया लेकिन जहां पहुंचना था वहां पहुंचा नहीं. सब करने के बाद भी व्यापारिक संस्थान और व्यापारी डिफाल्टर बन जाते हैं. साफ्टवेयर भी इस तरह से बन रहे हैं कि वे बाजार में आते ही आऊट डेटिड हो जाते हैं.

बैंकों में सबसे ज्यादा परेशानी भी इस तरह के साफ्टवेयर से हो रही है. कभी भी काम रुक जाता है कि सर्वर काम नहीं कर रहा है. बाजारों में बिल कलेक्शन आदि तमाम कार्यों के साफ्टवेयर लगे हैं और उनमें भी सुचारू रूप से काम नहीं हो रहा- यहां भी सर्वर डाऊन होता रहता है.

अब तो सभी लोग यह चाहते हैं कि ऐसे साफ्टवेयर बनना चाहिये जिसमें निर्माता कम्पनी की यह गारंटी हो कि उस साफ्टवेयर सिस्टम में सर्वर डाउन नहीं होता है. किसी नौकरी या ऑनलाइन खरीदी के आवेदन आने में अक्सर यह होता है कि साइट क्रैश हो गई. आधार से पहले बेपढ़े लोग अंगूठा लगाते थे और वह हस्ताक्षर की तरह ही पूरा काम करता था. अब ‘आधार’ में भी अंगूठा और उंगलियों के निशान आ गये.

आम धारणा यही रही कि एक बार ये निशान दे दिये और वे हमेशा के लिये अटल हो गए. लेकिन अब लोगों से ठीक ‘आधार’ के जरिये काम के वक्त यह कहा जाने लगा है कि उनके अंगूठे व उंगलियों के निशान मेच नहीं कर रहे हैं- उनमें परिवर्तन आ चुका है- पहले वे अपना ‘आधार’ फिर से अपडेट करायें तभी उनका काम हो सकेगा. परीक्षाओं और नौकरियों के इंटरव्यू रेलवे में टिकिट में यह परेशानी कभी भी आ जाती है.

अब तो ‘आधार’ तभी आधार बन सकता है जब उसे लगातार अपडेट कराया जाता रहे.सहूलियत के नाम पर रसोई गैस की बुकिंग ऑनलाइन कर दी गयी है- उसे लगाते ही यह आदेश चलने लगता है कि यह नम्बर दबाओ, 10-15 नंबरों में लोगों को घुमाया जाता है और बुकिंग नहीं हो पाती.

साफ्टवेयर सिस्टम कुछ इस ढंग से अपडेट हो रहे हैं कि सभी वर्ग के लोगों की परेशानियां बढ़ती जा रही हैं. डिजिटल इंडिया, पूरा सिस्टम ‘आधार’ पर मोदी सरकार के जुमला बन गये हैं. ‘आधार’ का मामला अभी तक सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है. लोग उसे कोर्ट में चुनौती दे रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट उसकी अनिवार्यता पर रोक लगा देते हैं. राशन की दुकानों पर गरीबी रेखा से नीचे के लोग खरीदी करते हैं- उन्हें भी यह कहकर राशन नहीं दिया गया कि उनकी उंगलियों के निशान नहीं
मिल रहे हैं.

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