हुये रसूखदारों के चेहरे उजागर,
एसटीएफ ने डाला था छोटी मछलियों पर हाथ

भोपाल,

सीबीआई की चार्जशीट अदालत में दाखिल होने के बाद ऐसे रसूखदारों के चेहरे व्यापमं मामले में बेनकाब हो गये, जिसका नाम चर्चित होने के बाद भी एसटीएफ ने कार्रवाई नहीं की थी. माना जा रहा है कि देश की सबसे बड़ी एजेंसी अभी एक और चार्जशीट दाखिल कर सकती है, जिसमें और भी चौंकाने वाले खुलासे संभावित हैं.

व्यापमं घोटाला सबसे बड़ा बन चुका था. एसटीएफ ने इसमें करीब 500 लोगों की गिरफ्तारी की थी. जिसमें सबसे बड़ा नाम पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा का था. जब यह मामला सीबीआई को सौंपा गया तो पहले तीन माह जांच एजेंसी ने स्कोरर खोजने में ही खर्च कर दिये. देश के करीब 30 शहरों में संदिग्ध लोगों को खोजा गया. यह मामला अभी सिर्फ पीएमटी परीक्षा-2012 से संबंधित है.

इसमें स्कोरर जब सामने आ गये तो चिकित्सा शिक्षा विभाग, निजी मेडिकल कॉलेजों के संबंध उजागर होने लगे. प्रदेश के पांच मेडिकल कॉलेजों के संचालकों सहित चिकित्सा शिक्षा विभाग के संचालक व अपर संचालकों के चेहरे से भी नकाब उठ गया.

गत दिवस न्यायालय ने जिन 21 लोगों की जमानत याचिका खारिज की, उसमें चिरायु मेडिकल कॉलेज के डॉ. अजय गोयनका, पीपुल्स के सुरेश विजयवर्गीय, जेके मेडिकल कॉलेज के जे.एन. चौकसे, डॉ. एस.सी. तिवारी, डॉ. एन.एम. श्रीवास्तव, डॉ. डी.के. सत्पथी के नाम भी शामिल थे, जिनके नाम की चर्चा होने के बावजूद इनके रसूख के सामने एसटीएफ लाचार हो गई.

सीबीआई सूत्रों का कहना है कि अभी कुछ और चेहरे बेनकाब हो सकते हैं, क्योंकि इंदौर व उज्जैन के मेडिकल कॉलेजों में एडमीशन दिलाने का खेल भी लंबे समय से चल रहा था.

व्हीसिल ब्लोअर डॉ. आनंद राय का मानना है कि कार्यवाही आधी-अधूरी है एवं सबसे बड़ी जांच एजेंसी से अपेक्षा की जाती है कि वह अन्य पहलू भी उजागर करेगी.

खुल नहीं सका 56 मौतों का राज

व्यापमं एवं पीएमटी घोटाले में अभी तक 56 लोगों की मौत दर्ज हो चुकी है. सभी मामलों में सीबीआई ने क्लीन चिट दी थी. सबसे पहले मेडिकल छात्रा नम्रता डाभौर का शव उज्जैन के समीप पटरी के किनारे मिला था. यह रहस्य आज भी बरकरार है कि झाबुआ निवासी नम्रता उस स्थान पर कैसे पहुंची, जहां शव मिला था.

इसी तरह कुछ अन्य मामले भी संदिग्ध हैं, क्योंकि उनकी भी असमय मौत हुई थी या उन्होंने मौत को गले लगाया था. संभव है आने वाले दिनों में सीबीआई कोई नया खुलासा कर दे.

यह था पूरा मामला

2012 पीएमटी रिजल्ट के बाद सीटों की बंदरबांट की गई. निजी कॉलेजों ने जो स्कोरर परीक्षा में बैठाये थे, उनसे सीट सरेंडर कराकर बेच दी गई. यहां तक कि एनआरआई व आरक्षित वर्ग की सीट बेचकर अधिकारियों व कॉलेज संचालकों ने अरबों रुपये का काला कारोबार किया.

 

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