• दो साल से एक भी मामला नहीं पहुंचा कोर्ट
  • गंभीरता नहीं दिखा रहा महिला बाल विकास विभाग

बैरसिया,

सरकार ने घरेलू हिंसा से प्रताडि़त होने वाली महिलाओं की सहायता के लिये 2005 में घरेलू हिंसा की रोकथाम के लिये महिला बाल विकास विभाग के परियोजना अधिकारी को घरेलू हिंसा के मामलों का प्रोटेक्शन अधिकारी बनाया गया है. और इस काम के लिए सरकार से परियोजना अधिकारी को 15 हजार रुपए प्रतिमाह दिया जाता है.

परियोजना अधिकारियों ने कुछ दिन इस योजना पर बड़ी तेजी से घरेलू हिंसा के मामले बना कर न्यायालय भेज पीडि़त महिलाओं को न्याय दिलाया. लेकिन गत एक वर्ष से यह योजना महिला बाल विकास विभाग के कार्यालयों में दफन होती दिखाई दे रही है. जबकि घरेलू हिंसा के मामलो में बढ़ोतरी हुई है.

लेकिन विगत दो साल से घरेलू हिंसा से जुड़ा एक भी मामला महिला बाल विकास विभाग ने न्यायालय की चौखट पर नही पहुँचाया है. जबकि क्षेत्र में बड़ी संख्या में घरेलू हिंसा से पीडि़त महिलाएं देखी जा सकती है.

ये हैं सुविधाएं

महिला बाल विकास विभाग घरेलू हिंसा से पीडि़त महिला की सूचना मिलते ही उसके घर जा और आवेदन ले पूरा प्रकरण तैयार कर न्यायालय भेजा जाता है. और पीडि़ता को कोर्ट तक आने जाने का किराया या सरकारी वाहन से घर से लाया व छोड़ा जाता है. पीडि़त का प्रकरण निराकरण होने तक वकील एव अन्य खर्चा विभाग ही वहन करता है. घरेलू हिंसा की घटना की जानकारी देने वाले का नाम भी गुप्त रखने के निर्देश सरकार ने दे रखे हैं.

ये घटनाएं घरेलू हिंसा के दायरे में आती हैं

घरेलू हिंसा के दायरे में दहेज प्रथा से उत्पीडि़त महिला एवं सास, ससुर, ननद व पति, पिता, भाई या ससुराल से भगा दी गई प्रताडि़त हो, या फिर घर के आसपास किसी भी व्यक्ति द्वारा रोज झगडे में महिला को प्रताडऩा दी जा रही हो. या महिला पर किसी प्रकार की जोर ज्यादती की जा रही हो या वाल विवाह का मामला हो ऐसे सभी मामलों में महिला बाल विकास विभाग सूचना मिलते ही घरेलू हिंसा का प्रकरण बना सकता है.

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