शाजापुर, नवप्र.

एक तरफ सरकार हरियाली को बढ़ावा देने के लिए पेड़ लगाओ अभियान पर करोड़ों रुपए पानी की तरह बहा रही है, वहीं दूसरी ओर हरियाली के दुश्मन प्रशासन की आंखों में धूल झोंककर हरे-भरे पेड़ों पर भी कुल्हाड़ी चलाने से बाज नहीं आ रहे.

ऐसा ही एक मामला रविवार को काशी नगर में सामने आया. दरअसल, भट्ट मोहल्ला निवासी बृजवल्लभ राधावल्लभ दुबे ने 9 जनवरी 2017 को नगर पालिका में आवेदन देकर वार्ड क्रमांक 13 में ग्राम मगरिया भूमि सर्वे क्रमांक 14, 15, 16 में स्थित तीन आम के वृक्ष काटने की अनुमति मांगी थी.

इस आवेदन में बृजवल्लभ द्वारा बताया गया था कि तीनों आम के वृक्ष लगभग 50 से 60 साल पुराने हैं, जिनमें कीड़े लगने से वे आधे सूख चुके हैं. पेड़ों की शाखाएं पास के भवन पर झुकी हुई हैं.

कभी भी तेज हवा-आंधी में अचानक गिरने से जनधन, भवन की हानि संभावित है. इस आवेदन के आधार पर नगर पालिका ने कीड़े लगे सूखे पेड़ों को काटने की सशर्त अनुमति पत्र क्रमांक/ राजस्व/ 2017/ 1010, शाजापुर के माध्यम से दिनांक 24.03.2017 को जारी की. अनुमति मिलने के करीब 10 महीने बाद जिम्मेदारों ने प्रशासन की आंखों में धूल झोंकते हुए सूखे पेड़ों की जगह हरे-भरे फलदार पेड़ों पर कुल्हाड़ी चला दी.

पटवारी ने बनाया पंचनामा

हरे पेड़ काटने की सूचना जैसे ही प्रशासन को लगी, तो पटवारी महेश मंडलोई अमले के साथ मौके पर पहुंचे. यहां उन्होंने पाया कि सूखे पेड़ की अनुमति की आड़ में जिम्मेदारों द्वारा हरे भरे फलदार पेड़ काट दिए गए. इतना ही नहीं जिम्मेदारों ने अनुमति लेते वक्त बताया था कि पेड़ की टहनियां भवन पर झुक रही है, जिससे हादसे की आशंका है.

लेकिन मौका मुआयना करने के दौरान पटवारी ने पाया कि मौके पर तो नवीन भवन के निर्माण का काम चल रहा है. ऐसे में पेड़ काटना नियम विरुद्ध है. प्रशासनिक अमले ने बताया कि नपा द्वारा दी गई अनुमति में स्पष्ट उल्लेख किया गया था कि यदि पेड़ पर फल या मोर लगे हों, तो पेड़ नहीं काटा जाए, लेकिन अनुमति लेने वालों ने हरे फलदार पेड़ों पर ही कुठाराघात कर दिया. फिलहाल मामले में पटवारी ने पंचनामा बनाकर रिपोर्ट वरिष्ठ अधिकारियों को सौंप दी है.

ऐसे कैसे दे दी अनुमति?

आम व्यक्तियों के लिए नगर पालिका में नियम कायदों की लंबी फेहरिस्त है, लेकिन रसूखदारों के लिए ये नियम क्यों शिथिल कर दिए जाते हैं. हरे भरे पेड़ों की कटाई के मामले में कुछ ऐसा ही देखने को मिल रहा है.

क्योंकि जनवरी 2017 में जब बृजवल्लभ दुबे द्वारा पेड़ काटने के लिए अनुमति मांगी गई थी, तो क्या नगर पालिका के जिम्मेदारों ने मौके पर जाकर वास्तविकता जानने का प्रयास किया होगा. शायद नहीं, क्योंकि अगर कोई जिम्मेदार मौके पर जाता, तो उसे सूखे और हरे-भरे पेड़ में कुछ तो अंतर समझ में आ गया होता. लेकिन नपा प्रशासन ने जाने-अनजाने में ही सही आवेदन पर आंख मूंदकर भरोसा करते हुए सूखे पेड़ों की आड़ में हरे पेड़ काटने की अनुमति दे दी.

इनका कहना है…

‘सूखे पेड़ों की कटाई की अनुमति ली गई थी, लेकिन हरे फलदार पेड़ों को काट दिया गया. जो नियम विरुद्ध है. मामले में पंचनामा बनाकर रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को सौंपी गई है.’- महेश मंडलोई, पटवारी
‘नियमानुसार मौका मुआयना करने के बाद ही पेड़ काटने की अनुमति दी जाती है.

अनुमति का गलत उपयोग करने पर फिलहाल निर्माण कार्य रूकवा दिया गया है. तहसीलदार की रिपोर्ट मिलने के बाद नगर पालिका अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही की जाएगी.’- भूपेंद्र कुमार दीक्षित, सीएमओ-शाजापुर