सूचना नहीं देने के दोषी 406 अधिकारियों ने भरा 30 लाख रु. जुर्माना

    खतरे में पारदर्शिता

  • फरवरी 2014 से अब तक दंडित हुए अधिकारियों की संख्या – 406
  • जुर्माना भरने वाले अधिकारियों का मासिक औसत – 9 से 10
  • राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने की सबसे कम राशि – 250 रुपये
  • राज्य सूचना आयोग द्वारा लगाए गए जुर्माने की सबसे अधिक राशि – 50,000 रुपये
  • अब तक लगाए गए जुर्माने की कुल राशि – 30 लाख रुपये

भोपाल,

राज्य सरकार के पारदर्शिता के दावों के विरूद्ध एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. बताया जाता है कि पिछले चार वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि राज्य में हर तीसरे दिन कम से कम एक अधिकारी या नौकर-शाह पर सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं देने के लिए जुर्माना लगाया गया है.

नौकरशाहों पर लगने वाला यह जुर्माना 250 रुपये से लेकर 50,000 रुपये तक रहा है. राज्य सूचना आयुक्त द्वारा यह पाए जाने पर कि आवेदक को नौकरशाह के द्वारा सूचना के अधिकार के तहत जानबूझकर जानकारी नहीं दी गई है, ये जुर्माने लगाए गए हैं. यहां यह बताना जरूरी है कि वर्ष 2014 में पांच राज्य सूचना आयुक्त तथा एक मुख्य आयुक्त की नियुक्ति की गई है.

इसके पूर्व लगभग एक वर्ष तक ये पद खाली पड़े थे. इस मामले को लेकर जब कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया तब कहीं जाकर ये नियुक्तियां हो पाईं. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य सूचना आयोग द्वारा फरवरी 2014 से कुछ 406 अधिकारियों एवं नौकरशाहों पर जुर्माना लगाया है.

ये वे अधिकारी हैं जो आवेदकों को सूचना के अधिकार के तहत जानकारी नहीं देने के दोषी पाए गए हैं. संख्या की दृष्टि से हर वर्ष लगभग सौ या दूसरे शब्दों में हर तीसरे दिन एक अधिकारी दंडित हुआ है. इन 406 अधिकारियों को जुर्माने के रूप में कुल 30 लाख रुपये भरना पड़ा है.

यदि कोई आवेदक सूचना के अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी से संतुष्ट नहीं होता है तो वह उसी विभाग उच्च अपीलीय अधिकारी के पास जा सकता है. उच्च अपीलीय अधिकारी भी आवेदक की शिकायत का समाधान नहीं कर पाता है तो वह राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटा सकता है .

जिसका निर्णय अंतिम होता है. राज्य सूचना आयोग की स्थापना सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत की गई है. सूत्रों का कहना है कि लंबित पड़ी अपीलों की संख्या ज्यादा होने के कारण आयोग में प्रकरणों के निपटारे की प्रक्रिया अत्यंत धीमी है.

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