भारत की दुनिया के विशाल भू-भाग के देशों में से एक होने के कारण विश्व व विशेषकर एशिया की राजनीति और सैन्य शक्ति में एक बड़ी भूमिका है. वर्तमान में चीन के साथ हर क्षेत्र में बड़ी प्रतिस्पर्धा है.

आजादी आने के समय कुछ वर्ष पूर्व ही द्वितीय विश्व युद्ध समाप्त हुआ था. दुनिया के लोग उसकी त्रासदी से उभर रहे थे. भारत ऐसे ही समय आजाद हुआ और फौरन ही पंचवर्षीय योजनाओं के माध्यम से देश के विकास में जुट गया.

केवल काश्मीर पर पाकिस्तान से सैन्य स्वरूप की तनातनी बनी हुई थी. ऐसे में भारत की यह नीति रही कि प्राथमिकता में सैन्य शक्ति बढ़ाने की जरूरत नहीं है और उसे साधारण रूप में बनाये रखा जाए और पूरे संसाधन विकास में लगा दिया जाए. उन परिस्थितियों में प्रधानमंत्री पंडित नेहरू की ही यह स्वाभाविक शासन प्रणाली रही.

हमने अपनी लगभग सभी सैनिक जरूरतें विकसित देशों से खरीदना ही ठीक समझा. देश में अंग्रेज काल से कुछ आर्डीनेन्स फैक्ट्रियां भी कार्यरत थीं. लेकिन 1962 में चीन के विश्वासघात और सीमा पर हमले से देश को यह यथार्थ का बोध कराया कि हमें विकास में सैन्य विकास को भी शामिल करना होगा.

एक समय ऐसा भी आया कि अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन ने भारत को लड़ाकू विमान और आगे देना बंद कर दिया. इसके फलस्वरूप भारत सोवियत संघ (रूस) से रक्षा सौदे जिनमें मिग लड़ाकू विमान भी लेने लगा. अमेरिका को उसका आज तक पश्चाताप है कि उसने भारत के रूप में एक बड़ा सैनिक साजो-सामान का खरीददार खो दिया.

लेकिन भारत ने इसके साथ ही देश में रक्षा उत्पादन की ओर ध्यान दिया. देश में मिसाइल बनाने और परमाणु बम बनाने का प्रोग्राम प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने ही शुरू किया और देश की दिशा को सैन्य विकास की तरफ तेजी से ले गयीं.

आज देश मिसाइल के क्षेत्र में दुनिया के अन्य देशों से भी अग्रणी भूमिका में है. श्रीमती गांधी ने ही देश को परमाणु बम बनाकर दुनिया में परमाणु शक्ति का राष्ट्र बनाया. कानपुर में हिन्दुस्तान ऐरोनोटिक ने विमान बनाने का काम शुरू किया जिसका तेजस लड़ाकू विमान हाल ही में भारतीय वायुसेना में शामिल हुआ है.

प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रोग्राम को और आगे बढ़ाया है. अभी तक हम जिन देशों से सैन्य सामग्री खरीदते रहे अब उनसे कहा जा रहा है कि अब मेक इन इंडिया के तहत यहीं भारत में आकर इन्हें बनाएं. रूस भारत में उसका लड़ाकू विमान मिग बना रहा है. फ्रान्स का लड़ाकू विमान राफेल भी भारत में बनाया जायेगा.

अब भारत के निजी क्षेत्र के लिये रक्षा उत्पादन का क्षेत्र खोल दिया गया है. फ्रांस के राफेल से भारत का अम्बानी उद्योग निर्माण में सहभागिता कर रहा है. टाटा ब्रिटेन के लड़ाकू विमान जुगआर के लिए सहभागी बना है. अमेरिका भी उसका एफ-16 फ्राइटर प्लेन भारत में बनाने पर सहमत है.

बुन्देलखंड के झांसी में आर्मी की ब्रिगेड और पास ही बबीना में टैंक-आर्टीलरी कमांड है. अभी श्री मोदी ने बुंदेलखंड में रक्षा उत्पादन के कारखानों को स्थापित करने की एक श्रृंखला की घोषणा कर दी है. शीघ्र ही अति पिछड़ा व सूखाग्रस्त क्षेत्र बुन्देलखंड रक्षा सामग्री कारखानों का हब बनने जा रहा है.

भारत ने हाल ही में सैनिक उपयोग की नयी राइफल 155 एमएम एडवांस्ड टोड आर्टीलरी गन विकसित की है. नौसेना के क्षेत्र में भारत विध्वंसक युद्धपोत व सबमेरीन (पनडुब्बी) बनाने लगा है. इसे मेक इन इंडिया के तहत फ्रांस सहयोग दे रहा है और यहीं इनका निर्माण हो रहा है.

Related Posts: