चित्रदुर्ग,

कांग्रेस के कर्नाटक में पारंपरिक गढ़ रहे चित्रदुर्ग जिले में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) राज्य में सिद्धारमैया की अगुवाई वाली सरकार की विफलताओं तथा जातीय समीकरण के सहारे बेड़ा पार करने की जुगत में है।

इलाके में हिंदूत्व का कोई मुद्दा नहीं होने का पूरा फायदा कांग्रेस के पक्ष में है, हालांकि कांग्रेस के इस मजबूत किले में सेंधमारी को लेकर भाजपा कोई कोर कसर बाकी नहीं छोड़ रही है।

वर्ष 2013 के चुनाव में कांग्रेस ने जिले में बेहतर प्रदर्शन किया था तथा इसके बाद हुए लोकसभा चुनाव में ‘नरेन्द्र मोदी लहर’ के बावजूद बी एन चंद्रप्पा यहां के कांग्रेस सांसद चुने गये थे।

हालांकि सत्ता में लौटने के लिए बेताब, भगवा पार्टी ने किताब में लिखी सभी चुनावी खेलों को आजमा लिया है और संभवत: ऐसा उसने जिले के छह विधान सभा निर्वाचन क्षेत्रों में एक सम्मानजनक प्रदर्शन करने के लिए किया है।

जैसा कि भाजपा जिला इकाई प्रवक्ता नागराज भेडरे ने कहा,“जिले के तहत सामान्य सीट होसदुर्गा में, हमने अनुसूचित जाति समुदाय के नेता होसदुर्गा के विधायक गोओलिहट्टी शेखर को मैदान में उतारा है। यह केवल भाजपा की प्रतिबद्धता और वंचित समुदायों के लिए उच्च सम्मान को दर्शाता है और हमें इस सीट को जीतना है।”

पूर्व खेल मंत्री श्री शेखर, जिन्होंने तत्कालीन मुख्यमंत्री और वर्तमान राज्य भाजपा अध्यक्ष बी एस येदियुरप्पा के खिलाफ विद्रोह किया था, वह कांग्रेस के मंत्री और वरिष्ठ नेता बी जी गोविंदप्पा के खिलाफ हैं, जो कि एक क्रूबा नेता हैं।

भाजपा सर्वेक्षण रणनीतिकारों के मुताबिक, पार्टी को चित्रदुर्ग विधानसभा की सीट पर कब्जा करने का पूरा भरोसा है जहां विधायक जी एच थिपरेश्डी को फिर से मैदान में उतर दिया गया है।

भाजपा ने जब बेल्लारी के सांसद बी श्रीमुलू को पडोसी जिले से उम्मीदवार घोषित किया तो पार्टी के इस कदम से राजनीति के हलकों में आश्चर्य हुआ।

माेलाकालमुरु से लड़ने वाले अनुसूचित जनजाति नायक के एक शीर्ष नेता श्री श्रीमुलू कांग्रेस के गढ़ पूरे चित्रदुर्ग जिले में वोट को प्रभावित कर सकते हैं। श्रीमुलू खनन माफिया जी जनार्दन रेड्डी के भी करीबी सहयोगी हैं।

कांग्रेस कार्यकर्ता यह भी जानते हैं कि श्रीमुलू के मैदान में आने के साथ-साथ अनुसूचित जनजाति वाले मोलकालमुरु के लिए लड़ाई काफी जटिल और कठिन हो सकती है। हालांकि, कांग्रेस के पिछड़ा वर्ग के सेल के जिला स्तर के अध्यक्ष जी मनोहर ने कहा,“ भाजपा की अधिकांश गणना गड़बड़ हो जाएगी क्योंकि चित्रदुर्ग जिला हमेशा भाजपा की सांप्रदायिक राजनीति से दूर रही है।”

वास्तव में, वह जोर देते हैं कि कई कांग्रेस कार्यकर्ताओं के लिए इस जिले में काम करने की एक बड़ी संतुष्टि यह है कि भाजपा की लोकप्रियता ‘मोदी लहर’ की सवारी में भी, कांग्रेस 2014 लोकसभा चुनाव जीतने में सफल रही। जैसा कि मनोहर कहते हैं, “परंपरागत रूप से हम इस जिले में मजबूत हैं और हम अपनी पकड़ बरकरार रखेंगे। भव्य पुरानी पार्टी निश्चित तौर पर होलालकेरे (एससी आरक्षित), चैल्लकेरे (एसटी आरक्षित) और हिरीयूर जैसी महत्वपूर्ण सीटों को जीतने में सफल होगी।”

कांग्रेस रणनीतिकारों का कहना है कि चित्रदुर्ग विधानसभा सीट में ही टिकट उम्मीदवारों के रूप में करीब 20 लोग सामने आये हैं। इनमें से एक का कहना है कि कांग्रेस की संभावनाएं उज्ज्वल हैं।

उन्होंने कहा,“भाजपा ने मौजूदा विधायक थिप्पारेड्डी को मैदान में उतारा है। जाति समीकरणों से साफ है कि हम अन्य पिछड़ी जाति के धोढानागया समुदाय को गोलया (या यादव) बहुल निर्वाचन क्षेत्र में अपने पक्ष में करें। बताया जाता है कि चित्रदुर्ग विधानसभा क्षेत्र में लगभग 25,000 गोलया जाति समुदाय के मतदाता हैं।

कई नागरिक कांग्रेस नेता के इन विचारों का समर्थन करते हैं। चित्रदुर्ग- चालकरे रोड के रेस्तरां के मालिक असलम अंसारी कहते हैं,“यह सच है कि यहां कोई हिंदुत्व का प्रभाव नहीं है। यह कांग्रेस के लिए अनुकूल है और इसलिए हमारे जिले में भाजपा कमजोर है।”

हालांकि, अंसारी का कहना है कि कांग्रेस मुस्लिम उम्मीदवार का चुनाव कर सकती है क्योंकि इस निर्वाचन क्षेत्र में करीब 35,000 मुस्लिम मतदाता हैं। उन्होंने कहा,“मुझे लगता है कि कांग्रेस को कांग्रेस के अनुभवी सी के जाफर शरीफ के रिश्तेदार महबूब पाशा को मैदान में रखना होगा।”

भाजपा के नेताओं का कहना है कि इस साल के चुनावों में निर्णय लेने में कांग्रेस की लापरवाही महत्वपूर्ण कारक होगी। जैसा कि भाजपा के प्रवक्ता श्री बेडरे कहते हैं,“चित्रदुर्ग जिले में हमारी बीजेपी सरकार द्वारा स्वीकृत चिकित्सा महाविद्यालय अभीतक नहीं खुला। कांग्रेस ने इस जिले में उपेक्षा की और जाति की राजनीति की।

बहरहाल अभी तक कागज पर तो कांग्रेस की स्थिति यहां काफी मजबूत मालूम होती है लेकिन भाजपा को भी अपने ‘मोदी लहर’ पर सवार हाेने का लंबा अनुभव हो गया है क्योंकि इसने 2014 के बाद हुए विभिन्न राज्यों के चुनाव में 12 राज्यों पर कब्जा किया है जिनमें 10 कांग्रेस शासित राज्यों के थे।

भाजपा ने अपने 11वें शिकार के लिए कर्नाटक को लक्ष्य किया है और यहीं से उसके लिए अन्य दक्षिणी राज्यों में भी प्रवेश का मार्ग प्रशस्त होगा।

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