नई दिल्ली, 23 दिसंबर. रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने बृहस्पतिवार को माना कि फिलहाल रेलवे आर्थिक संकट से जूझ रही है. हालांकि उन्होंने कहा कि रेलवे का पीपीपी माडल से आधुनिकीकरण किया जाएगा और इसके लिए 12वीं पंचवर्षीय योजना में 5.60 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी.

त्रिवेदी ने रेलवे विनियोग विधेयक, 2011 और अनुपूरक मांगों तथा रेलवे संपत्ति संशोधन विधेयक, 2008 पर चर्चा का जवाब देते हुए यह बात कही. इसके साथ ही राज्यसभा ने इन दोनों विधेयकों को पारित कर दिया. त्रिवेदी ने कहा कि रेलवे में फंड की कमी है और मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं हो रहा है. 1975 से रेलवे लाइनों की परियोजनाएं लंबित पड़ी हैं.

अध्यक्षता में एक विशेष
समिति गठित-हर मंत्री दबाव में बजट में और योजनाओं की घोषणा कर देता है पर पैसे नहीं होते. बहरहाल, उन्होंने कहा कि भारतीय रेलवे को विश्वस्तरीय बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि देश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए अगले पांच साल में एक खरब डालर खर्च किए जाने हैं उसमें से बड़ा हिस्सा रेलवे को जाएगा. त्रिवेदी ने कहा कि रेलवे के आधुनिकीकरण के लिए सैम पित्रोदा की अध्यक्षता में एक विशेष समिति गठित की गई है.

खान-पान के स्तर में भारी गिरावट का मुद्दा
इससे पहले सांसदों ने रेलवे की खस्ता हालत पर चिंता जाहिर की. भाजपा के प्रभात झा ने कहा कि रेल का अधिशेष गत तीन वर्षों में 19 हजार करोड़ रुपये घटकर मात्र 75 लाख रुपये हो गया. वहीं अन्य दलों के सांसदों ने भी अपने यहां रेलवे की परियोजनाओं के लंबित रहने का मुद्दा उठाया. सांसदों ने रेलवे के पास अब तक कोहरे से निपटने की बेहतर प्रणाली नहीं होने और रेलवे में खान-पान के स्तर में भारी गिरावट का मुद्दा भी उठाया.

सिर्फ एक लाख
संसद ने रेलवे की सिर्फ एक लाख रुपये की अनुपूरक मांगों पर बृहस्पतिवार को मुहर लगा दी. इस प्रक्रिया में दोनों सदनों में बहस हुई, जिसका रेल मंत्री दिनेश त्रिवेदी ने जवाब भी दिया. हालांकि लोकसभा में मंत्री ने साफ किया कि यह अनुपूरक मांगें केवल तकनीकी हैं. मालूम हो कि रेलवे का सालाना बजट एक लाख करोड़ रुपये का है.

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