लन्दन ओलम्पिक का 2012 जुलाई 27 से अगस्त 12 तक 16 दिन चलकर समापन हो गया. भारत ने 2 रजत व 4 कांस्य पदक जीतकर नई उपलब्धि की ओर कदम बढ़ाया है. कुश्ती में सुशील कुमार लगातार दो बार पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी हैं. उन्होंने पहला पदक चीन के बीजिंग ओलम्पिक में जीता, जो कांस्य था और अब लन्दन ओलम्पिक में उन्होंने कीर्तिमान बनाकर उसे रजत पदक कर दिया. कुश्ती में ही योगेश्वर दत्त ने कांस्य पदक जीत लिया. दूसरा रजत पदक निशानेबाजी में विजय कुमार ने जीता. अन्य पदक कांस्य पदक विजेताओं में श्री गगन नारंग- निशानेबाजी, साइना नेहवाल- बेडमिंटन और एम.सी. मेरीकाम ने- मुक्केबाजी रहीं.

हॉकी में हमारा प्रदर्शन बहुत ही खराब रहा. हम हॉकी तालिका में सबसे नीचे रहे. एक लम्बा समय ओलम्पिक खेलों में ऐसा भी रहा कि जब हॉकी में स्वर्ण पदक भारत के लिये सुनिश्चित और आरक्षित माना जाता था. भारत हमेशा हॉकी का स्वर्ण पदक जीतता रहा. एक वह दौर था जब हम सबसे ऊपर हुआ करते थे और आज हम सबसे नीचे हैं. जब वह दिन नहीं रहा तो यह दिन भी नहीं रहेगा. भारत अपना इतिहास दोहरा भी सकता था. उस स्वर्णिम युग में भारत के मेजर ध्यानचंद दुनिया में हॉकी के जादूगर माने गये. उनके सहयोगी रूपसिंह भी हॉकी की हस्ती रहे.

टेनिस में सानिया मिर्जा व लिएन्डर पेस आगे नहीं आ पाये, लेकिन बेडमिंटन में साइना नेहवाल कांस्य छलांग  लगाकर संभवत: आगामी  ओलंपिक में स्वर्ण मेडल तक पहुंच सकती हैं. अगला ओलंपिक 2016 में ब्राजील के रियो डी जीनरियो नगर में होगा. लंदन ओलंपिक में 204 देशों के साढ़े दस हजार खिलाडिय़ों ने भाग लिया और 302 खेलों में 960 पदकों को प्रदान किया गया.

गत बीजिंग ओलंपिक में चीन प्रथम था. यह स्थान उसने अमेरिका को पीछे कर प्राप्त किया था. इस बार अमेरिका ने चीन को पीछे कर पुन: प्रथम स्थान पर आ गया. उसने 46 स्वर्ण पदक जीते. चीन को 38 स्वर्ण पदक हासिल हुए. भारत 55वें स्थान पर रहा. अभी हमें बहुत आगे जाना है. देश में स्पोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया हमारे खेलों की राष्टï्रीय संस्था है. अब कई जगह स्टेडियम भी स्थाई तौर पर खेल गतिविधियों को संचालित करते हैं. सश सेनाओं व पुलिस में खेलों का संचालन सेवा का अंग ही बना हुआ है. इसमें शैक्षणिक संस्थाएं भी अब काफी सक्रिय हो गई हैं.

सानिया मिर्जा ने टेनिस में नाम कमा कर लड़कियों की इस तरह हौसला अफजाई की है कि कोई भी लड़की चाहे तो लगन और प्रशिक्षण से अंतरराष्टï्रीय जगत तक अपनी प्रतिभा व ख्याति हासिल कर सकती है. एक अरसे तक महिलाओं को हल्के-फुल्के काम के लायक ही समझा जाता रहा, लेकिन किरण बेदी ने भारतीय पुलिस सेवा (आई.पी.एस.) में जाकर यह साबित कर दिया कि महिला भी पुरुष के बराबर हैं. अब तो सशस्त्र पुलिस, वायुसेना व थल सेना में भी वे पहुंच गई हैं. ओलंपिक में कई भारतीय महिलाओं ने भाग लिया. साइना नेहवाल व मेरीकाम कांस्य पदक ले ही आईं.

भारत में खिलाडिय़ों को पूर्णकालिक दर्जा देकर भी भर्ती किया जाना चाहिये. तहसील, जिला, राज्य व राष्ट्र स्तर पर जो भी खिलाड़ी प्रतिभाशाली लगे उन्हें अच्छे वेतन पर स्थाई तौर पर स्टेडियम में नियमित अभ्यास के लिये रखा जाये. कई आदिवासी क्षेत्रों में युवक कमाल के तीरंदाज होते हैं. मणिपुर राज्य में तो उनमें निशानेबाजी की प्रतियोगितायें होती हैं. इन्हें ओलंपिक के लिये तैयार किया जा सकता है. आदिवासी समुदाय आज भी तीर के युग में चल रहा है. यह उनकी परंपरा है. भारत जहां आर्थिक क्षेत्र में भारी प्रगति कर दुनिया की हस्ती बन गया है, उसी तरह हमें खेलों में 55वें स्थान ने उठकर प्रथम स्थान पर आना है.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

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