इस 2018 का राजधानी दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय स्तर का 26 जनवरी गणतंत्र दिवस अब तक का सबसे भव्यतम और राजनैतिक महत्व का रहा. सन् 1950 में संविधान बनने के साल से यह राष्ट्रीय स्तर का समारोह अब तक का इन 67 सालों से भारत का गणतंत्र और संविधान दर्शाता है वहीं 15 अगस्त का समारोह हमारी स्वतंत्रता को उद्घोषित करता है.

15 अगस्त 1947 को देश में राष्ट्रपति का पद कायम नहीं हुआ था और ब्रिटेन से भारत को सत्ता हस्तांतरण (ट्रांसफर ऑफ पावर) के प्रावधानों के तहत जून 1948 तक ब्रिटिश गवर्नर जनरल लार्ड माउंटबेटन ही उस पद पर कायम रहे.

इसलिए अपने आप यह परंपरा बन गई कि 15 अगस्त को प्रधानमंत्री पंडित नेहरू ध्वज फहराकर राष्ट्र को उद्बोधन देंगे. इस दरम्यान संविधान निर्माण की प्रक्रिया जारी रही और 26 जनवरी 1950 को वह लागू किया. इसके समारोह में ध्वजारोहण राष्ट्रपति द्वारा किया जाने व राष्ट्र को उद्बोधन देने की पंरपरा बन गयी.

ये दोनों 15 अगस्त स्वाधीनता दिवस और 26 जनवरी गणतंत्र दिवस राष्ट्र के सर्वोच्च समारोह है.
भारत में 26 जनवरी के समारोह में एक परंपरा के अनुरूप किसी अन्य राष्ट्रर के राष्ट्राध्यक्ष को गणतंत्र दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित किया जाता है. इस बार मोदी सरकार ने आसियान के सभी देशों के राष्ट्राध्यक्षों को इसमें एक साथ मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कर इस साल के कार्यक्रम को भव्यतम बना दिया. भारत भी इस आसियान का सदस्य राष्ट्र है.

इस साल इस समारोह में म्यनमार, थाईलैंड, कम्बोडिया, लाओस, वियतनाम, फिलीपीन्स, मलेशिया, इंडोनेशिया, सिंगापुर और ब्रुनेई के राष्ट्राध्यक्ष उपस्थित थे.

इस समारोह में परंपरा से भारत अपने सैन्य शक्ति का परेड में और झांकियों में लोकजीवन का प्रदर्शन करता है. लेकिन इस साल के गणतंत्र समारोह में भारत पूरे आसियान देशों के राष्ट्राध्यक्षो को एक साथ आमंत्रित कर उसकी राजनैतिक शक्ति का भी जबरदस्त प्रदर्शन कर दिया. इस समारोह के साथ यह अवसर आसियान के शिखर सम्मेलन का भी अवसर बन गया.

आसियान के सभी राष्ट्र इन दिनों काफी सतर्क भी हैं कि चीन प्रशांत महासागर उसकी कब्जेदारी का इरादा रखता है, जिसे भारत सहित आसियान का कोई भी देश व जापान, आस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और अमेरिका के अलावा विश्व का अन्य कोई भी राष्ट्र उसे चीन के प्रशांत महासागर में उसके कब्जेदारी के प्रयासों को स्वीकार नहीं करता.

सभी देश यह मानते हैं कि चीन का विस्तारवाद केवल भारत ही रोक सकता है. भारत ने भी इस गणतंत्र समारोह में आसियान की शक्ति, एकता व दृढ़ता से साबित कर दिया कि पूर्वी व दक्षिणी एशिया के सभी राष्ट्र भारत के साथ एकजुट होकर खड़े हैं और भारत उनके विकास में बहुत योगदान दे रहा है.

इस गणतंत्र समारोह के संदर्भ में भारत की सभी राष्ट्रों से संयुक्त व अलग-अलग द्विपक्षीय वार्ताएं व समझौतों पर भी हस्ताक्षर हुए. इस समारोह से भारत ने दुनिया में आसियान को एक बहुत ही शक्तिशाली संगठन के रूप में पेश कर दिया है.

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