मप्र में पुलिस कमिश्नर..

विश्व के कई प्रगतिशील देशों में पुलिस कमिश्नर प्रणाली को कानून-व्यवस्था बनाए रखने का सबसे प्रभावी माध्यम माना गया है. इसके साथ ही वर्ष 1983 में जारी छठी राष्ट्रीय पुलिस आयोग रिपोर्ट में भी 10 लाख से अधिक की आबादी वाले महानगरों के लिये इस प्रणाली को आवश्यक बताया गया था. पुलिस अनुसंधान एवं विकास ब्यूरो द्वारा वर्ष 2018 में जारी रिपोर्ट के अनुसार, देश के 15 राज्यों और 61 शहरों में पुलिस कमिश्नरी प्रणाली थी, इसके बाद कुछ अन्य राज्यों ने भी इसे अपनाया और अब गहन मंथन के बाद अब मध्यप्रदेश के इंदौर और भोपाल महानगरों में भी पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू कर प्रदेश के प्रशासनिक ढांचे में ऐतिहासिक परिवर्तन किया गया है. यह मामूली कदम नहीं है, वह इसलिए कि प्रदेश के दोनों शहरों में यह सिस्टम लागू करने के लिए विगत 40 साल में यह छठवां प्रयास था. पहली मर्तबा 1981 में इस दिशा में कोशिश हुई थी लेकिन अड़चनें आती रहीं, कामयाबी अब मिली है. इसके लिए निश्चित तौर पर प्रदेश सरकार का संकल्पभाव व प्रतिबद्धता सराहनीय है. संविधान के अनुच्छेद -7 के अनुसार लोक व्यवस्था और पुलिस राज्य के विषय हैं. अत: इन मामलों में नए कानून बनाने या कानूनों में संशोधन करने तथा विभिन्न समितियों, आयोगों की सिफारिशों को लागू करने का उत्तरदायित्व राज्य सरकारों को ही है और मप्र सरकार अपने इस दायित्व निर्वाहन के प्रति प्रतिबद्ध नजर आती है. विकास, आबादी की वृद्धि एवं पुलिस के कार्यक्षेत्र के विस्तार के साथ पुलिस अधीक्षक के पद के नवांतरण की आवश्यकता अनुभव की जाती रही है, इसीलिए मप्र सरकार ने पुलिस कमिश्नर प्रणाली की ओर रूख किया है. दरअसल कमिश्नर प्रणाली के अंतर्गत पुलिस और कानून व्यवस्था की सारी शक्तियाँ पुलिस कमिश्नर में निहित होती हैं तथा पुलिस कमिश्नर एकीकृत पुलिस कमान का प्रमुख होता है. मौजूदा दौर में पुलिस के समक्ष चुनौतियों में इजाफे के चलते पुलिस कमिश्नर प्रणाली ही सर्वाधिक उपयुक्त है. दिल्ली, मुंबई जैसे महानगरों में यह सिस्टम पहले से ही लागू है.

यह कहने में कोई हर्ज नहीं है कि स्वतंत्रता के बाद भी देश की नौकरशाही में बहुत अधिक परिवर्तन नहीं किये गए जबकि समय के साथ महानगरों के विकास से महानगरों में रोजगार के नए अवसर उत्पन्न हुए और बड़ी संख्या में लोगो ने गाँवों से आकर महानगरों में बसना शुरू किया. महानगरों में जनसंख्या का दबाव बढऩे के कारण विधि व्यवस्था को बनाए रखने में आने वाली नई चुनौतियों को देखते हुए कमिश्नरी प्रणाली की आवश्यकता महसूस की गई तथा पुलिस प्रणाली में सुधार के लिये गठित समितियों ने भी कमिश्नरी प्रणाली की अनुशंसा की. इतिहास खंगालें तो पता चलता है कि भारत में सबसे पहले पुलिस कमिश्नर की नियुक्ति ब्रिटिश शासन में कोलकाता शहर में वर्ष 1856 में की गई थी. इसी साल चेन्नई और फिर कुछ बरस बाद मुंबई में इस सिस्टम को अपनाया गया लेकिन स्वतंत्र भारत में कानून निर्माताओं ने इस सिस्टम के प्रति ज्यादा रुझान नहीं दिखाया.

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के बारे में माना जाता है कि वे लीक से हटकर एवं प्रशासन में नवाचार अपनाने के हिमायती हैं. इन्हीं सुप्रयासों का प्रतिफल है कि मप्र पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने वाला देश का 17 वाँ सूबा बन गया है. अभी भले ही भोपाल और इंदौर में यह नया सिस्टम लागू किया गया है लेकिन जल्द ही ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन एवं रीवा जैसे जिलों में भी हमें यह सिस्टम देखने को मिल सकता है, इस सिस्टम को अपनाने से पुलिस की कार्यप्रणाली में सकारात्मक परिणाम देखने को मिलेंगे ही.

नव भारत न्यूज

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