पहली बार जनजाति समाज से होंगी राष्ट्रपति, यह सिर्फ भाजपा में ही संभव: शर्मा


  • प्रदेश अध्यक्ष ने कहा-कांग्रेस ने तो पी.ए.संगमा को हराने का काम किया था

भोपाल। उड़ीसा की द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति पद के चुनाव में भाजपा और एनडीए की संयुक्त प्रत्याशी बनाया गया है, जो एक ऐतिहासिक कदम है। आजादी के बाद देश में पहली बार किसी जनजातीय महिला को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया गया है, जो सिर्फ भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है। इस फैसले के देश के जनजातीय समाज के हित में, महिलाओं के हित में दूरगामी परिणाम होंगे। इस निर्णय से देश और प्रदेश के जनजातीय समाज में हर्ष है। इस निर्णय के लिए मैं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, गृह मंत्री श्री अमित शाह जी, पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री जे.पी.नड्डा जी तथा एनडीए नेतृत्व का मध्यप्रदेश के कार्यकर्ताओं की ओर से अभिनंदन करता हूं, धन्यवाद देता हूं। यह बात भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष श्री विष्णुदत्त शर्मा ने मीडिया से चर्चा के दौरान कही।

सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास पर चलती रही है पार्टी
श्री शर्मा ने कहा कि सबका साथ, सबका विकास और सबका विश्वास स्व. अटलजी की सरकार और उसके पहले से भी भाजपा का मूलमंत्र रहा है। पार्टी की ओर से पूर्वोत्तर के जनजातीय नेता पी.ए.संगमा को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाया गया, लेकिन कांग्रेस ने उन्हें राष्ट्रपति नहीं बनने दिया। इसके अलावा एनडीए की सरकार ने ही ए.पी.जे. अब्दुल कलाम जी को अपना उम्मीदवार बनाया और वे देश के यशस्वी राष्ट्रपति रहे। इसके बाद अब जनजातीय समाज की द्रौपदी मुर्मू जी को राष्ट्रपति पद का प्रत्याशी बनाकर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी और भाजपा नेतृत्व ने इसी मंत्र को 100 फीसदी जमीन पर उतारने का काम किया है।

सामान्य कार्यकर्ता का पार्षद से राष्ट्रपति पद तक पहुंचना भाजपा में ही संभव
श्री शर्मा ने कहा कि उड़ीसा के जनजातीय क्षेत्र की एक सामान्य कार्यकर्ता पार्षद के पद से राष्ट्रपति चुनाव में पार्टी की प्रत्याशी घोषित हो जाती हैं, यह भारतीय जनता पार्टी में ही संभव है। उन्होंने कहा कि द्रौपदी मुर्मू जी का राजनीतिक जीवन 1997 से शुरू हुआ। एक सामान्य परिवार की सदस्य द्रौपदी मुर्मू जी पार्टी की पार्षद रही। इसके अलावा पार्टी की उड़ीसा इकाई में जनजातीय मोर्चा की उपाध्यक्ष रहीं। रायरंगपुर सीट से दो बार भाजपा की विधायक रहीं। इस दौरान उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का नीलकंठ पुरस्कार भी मिला। मार्च 2000 से मई 2004 तक उड़ीसा सरकार में राज्यमंत्री और झारखंड की पहली महिला राज्यपाल रही हैं।

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