देश में पहली बार ग्वालियर की एक अदालत ने घी में मिलावट के दोषी 4 व्यापारियों पर 10 और 12 लाख रुपयों का जुर्माना लगाते हुए कुल 22 लाख रुपयों का जुर्माना ठोक दिया. दिवाली के अवसर पर ग्वालियर व उसके पास के जिलों भिंड, मुरैना में भारी मात्रा में मिलावटी व जहरीला मावा राज्य भर में खासकर इंदौर और भोपाल में पकड़ा गया था. पूरे राज्य में इस दूषित मावे की इतनी दहशत थी कि लोगों ने मिठाइयां ही नहीं खरीदीं.

राज्य सरकार ने पूरे प्रदेश में प्रशासन को सख्ती से नए खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्यवाही करने की मुहिम चलाने का निर्देश दिया. इसी कानून के तहत ग्वालियर के इन 4 व्यापारियों प्रत्येक पर लाखों रुपयों का जुर्माना लगाया गया है. ए.डी.एम. सत्येंद्र सिंह ने अपने फैसले में कहा कि इन मामलों में घी में मिलावट का कृत्य क्षमा योग्य नहीं है क्योंकि इन्होंने मानव जीवन को खतरे में डाला है.ये व्यापारी फैक्ट्रियों में नकली घी बनाते थे. कई ब्रांड नामों से राज्य भर में रिटेल दुकानदारों में भी साठ-गांठ कर आम उपभोक्ताओं में खपाते थे. कुछ समय पूर्व राजधानी भोपाल में भी ऐसा ही मिलावटी घी पकड़ा गया जिसे वे अपने डिब्बों पर भारत सरकार का खाद्य शुद्धता का प्रमाण ”एग मार्क” छाप कर बेच रहे थे. भोपाल में केंद्र सरकार का एगमार्क का कार्यालय भी है वह भी इन्हें नहीं पकड़ पाया या भ्रष्टाचार के किसी जरिये से यह लोग यह कर पा रहे होंगे. ग्वालियर में व्यापारी पर लाखों रुपये का जुर्माना जरूर किया गया है. लेकिन इसके कानून में परिवर्तन कर इन्हें जेल भेजना व इनकी संपत्ति जब्त करना भी होना चाहिए. आज पूरा बाजार घी, दूध, मावा, मसाले, खाद्य तेल यहां तक कि कास्मेटिक की वस्तुएं भी जहरीले मिलावट की कर दी गई हैं. ब्रांड नेम के इलेक्ट्रानिक सामान भी नकली चल रहे हैं. ऐसा प्रतीत हो रहा है कि सारा व्यापार ही नकली हो गया है.

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