मुंबई, , 9 दिसंबर. पहले तेल कंपनियां व हवाई अड्डों और अब सरकारी विभागों ने एयर इंडिया और किंगफिशर एयरलाइंस की सिरदर्दी बढ़ा दी है. सेवा कर आयुक्त कार्यालय ने यात्रियों और ग्राहकों से हुई आमदनी के एवज में 220 करोड़ रुपये सेवा कर जमा नहीं करने पर मुंबई में दोनों विमानन कंपनियों के खाते सीज कर दिए.

सेवा कर आयुक्त (मुंबई) एस के सोलंकी ने बताया कि इस सप्ताह भारतीय स्टेट बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और यूको बैंक में एयर इंडिया के 10 खाते और किंगफिशर के ऐक्सिस बैंक में 11 खातों को सीज कर दिया गया. बैंकों को इन खातों में जमा धनराशि को बकाया भुगतान की अदायगी के लिए सेवा कर विभाग को देने के निर्देश दिए गए हैं. सोलंकी ने कहा, उन्हें (विमानन कंपनियों) प्रतिबद्धता जताने दीजिए और उसके बाद हम खातों को मुक्त करने पर विचार करेंगे. बैंकों द्वारा अगस्त के बाद से एयर इंडिया के खाते सीज करने की यह तीसरी घटना है, जबकि इससे पहले नवंबर में किंगफिशर के खाते सीज किए गए थे. विमान कंपनियां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर टिकटों की बिक्री पर सेवा कर की वसूली किया करती हैं. शुरुआत में उच्च श्रेणी की सेवाओं पर ही यह कर वसूला जाता था लेकिन इस साल सरकार ने इस कर के दायरे को सस्ती उड़ानों तक बढ़ा दिया.

एयर इंडिया कई हवाई अड्डों पर संचालित अपनी कार्गो सेवाओं पर भी सेवा कर की वसूली किया करती है. सोलंकी ने कहा कि दोनों विमानन कंपनियों ने अप्रैल से अगस्त के बीच सेवा कर का भुगतान नहीं किया है. उन्होंने कहा कि एयर इंडिया पर 150 करोड़ रुपये और किंगफिशर पर 70 करोड़ रुपये सेवा कर बकाया है. उन्होंने कहा, विमानन कंपनियों ने यात्रियों से कर की वसूली की लेकिन इसका भुगतान हमको नहीं किया. सोलंकी ने कहा, हमने एयर इंडिया के खिलाफ अगस्त में भी कार्रवाई की थी. खाते सीज होने के बाद उन्होंने हमें 15 करोड़ रुपये का भुगतान किया था. सितंबर में भी उन्होंने भुगतान नहीं किया, जिस वजह से हमें कार्रवाई करनी पड़ी. विमानन कंपनी ने कहा कि वह किस्तों में बकाया भुगतान करेगी. इसलिए एयर इंडिया द्वारा भुगतान नहीं करने के बावजूद हमने खाते सीज नहीं किए.

नवंबर के मध्य में हमने किंगफिशर के खाते सीज कर दिए और उनके खातों से 5 करोड़ रुपये की वसूली की. विमानन कंपनी ने कहा कि वह 30 सितंबर तक किस्तों में भुगतान करेगी. इसके बावजूद उन्होंने भुगतान नहीं किया और हमने उनके खाते सीज कर दिए. यह कार्रवाई वित्त अधिनियम के तहत की गई. कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक क्रेडिट या डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से सेवा कर का भुगतान कर सकती हैं. सोलंकी ने कहा कि उन खातों को सीज किया गया है जिनकी जानकारी विमानन कंपनियों ने पंजीकरण के समय सेवा कर विभाग को उपलब्ध कराई थी. उन्होंने कहा, हमने उनको उचित समय दिया था और नोटिस भी जारी किया कि उचित कदम नहीं उठाने पर उनके खाते सीज कर दिए जाएंगे. ‘उन्होंने कहा, च्खातों में ज्यादा रकम नहीं थी. एयर इंडिया के एक आला अधिकारी ने कहा, हम अंतरिम भुगतान करने जा रहे हैं और जिसके आधार पर वे संबंधित खातों को मुक्त करने के आदेश जारी करेंगे.’ एक अन्य अधिकारी ने कहा, नकदी की समस्या है. कई वेंडरों और कर विभागों के सामने प्रतिबद्धता जताई गई है कि सरकार की तरफ से मंजूरी मिलने पर सभी बकाया अदा कर दिए जाएंगे. हालांकि एयर इंडिया को वीआईपी उड़ानों के एवज में पूरा भुगतान मिलना बाकी है.ज् उधर, किंगफिशर के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया.

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