नई दिल्ली, 30 अगस्त.  पाकिस्तानी आतंकी अजमल आमिर कसाब को मौत की सजा मिलने में कई साल लग सकते हैं. मौत की सजा पाने वाले आरोपियों की दया याचिका सूची में उसका नंबर तेहरवां होगा. वह सीधे राष्ट्रपति के समक्ष दया की गुहार नहीं लगाकर अभी सर्वोच्च अदालत से ही फैसले पर पुनर्विचार करने की मांग कर सकता है और इसके बाद वह क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल कर सकता है.

पूर्व न्यायाधीश जस्टिस नागेंद्र राय के मुताबिक कसाब के मामले में ट्रायल कोर्ट, हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने तेजी से सुनवाई कर फैसला दिया है. उम्मीद है कि पाकिस्तानी आतंकवादी की ओर से पुनर्विचार याचिका दायर किए जाने पर भी शीर्ष अदालत कोई देरी नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि देश की कानूनी प्रक्रिया निर्धारित हैं और सर्वोच्च अदालत ही उसका अंतिम पड़ाव है. जहां से फैसला होने के बाद अपील का कोई रास्ता नहीं रहता. लेकिन शीर्ष अदालत अपने ही फैसले पर पुनर्विचार कर सकती है.

यह प्रक्रिया अभी शेष है और इसके बाद क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल की जा सकती है. हालांकि जस्टिस राय ने साफ किया कि क्यूरेटिव उन्हीं मामलों में दायर की जा सकती है जिनमें कोई बड़ी तकनीकी खामी हो. जस्टिस राय ने कहा कि सर्वोच्च अदालत ने विशेष अदालत और हाईकोर्ट के फैसले पर विचार करके साक्ष्यों, तर्कों और स्थितियों के आधार पर अंतिम फैसला दिया है. इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करना कसाब की मर्जी पर निर्भर है. यदि वह पुनर्विचार की मांग नहीं करता है तो फिर वह राष्ट्रपति के समक्ष दया की गुहार लगा सकता है. सर्वोच्च अदालत का फैसला आने के बाद पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए निर्धारित समय मिलता है जो 30 दिन होता है. यदि इस दौरान पुनर्विचार की मांग नहीं की गई तो सिर्फ दया याचिका का ही विकल्प शेष रह जाता है जिस पर राष्ट्रपति को फैसला लेना होता है. उन्होंने बताया कि यदि कसाब पुनर्विचार याचिका दाखिल करता है और उसे राहत नहीं मिलती तो फिर वह सर्वोच्च अदालत में क्यूरेटिव याचिका दायर कर सकता है. इसके बाद भी उसके पास राष्ट्रपति के समक्ष दया की मांग करने का रास्ता बचता है.

गृह मंत्रालय में नहीं अटकेगी कसाब के फांसी की फाइल

गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भरोसा दिलाया है कि आतंकी अजमल कसाब की फांसी की सजा पर अमल करने में बिलकुल देर नहीं की जाएगी. शिंदे के मुताबिक संसद पर हमले के गुनहगार अफजल गुरु की तरह कसाब को फांसी पर चढ़ाने की फाइल भी गृह मंत्रालय में नहीं अटकेगी. शिंदे ने  कहा कि अगर कसाब राष्ट्रपति के यहां दया याचिका दायर करता है तो सरकार सुनिश्चित करेगी कि इसका निबटारा जल्द से जल्द हो जाए. भाजपा भी कसाब को बिना देर किए फांसी पर चढ़ाने के वकालत की है. वहीं कानून मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला अपरिहार्य था.

सभी को उम्मीद थी सर्वोच्च अदालत कसाब की फांसी की बांबे हाईकोर्ट की सजा बरकरार रखेगी. फैसले में देर की बात को खारिज करते हुए खुर्शीद ने कहा कि उन्होंने बांबे हाईकोर्ट के उस फैसले को पढ़ा है. यह मामला बेहद पेचीदा था और अदालत को यह फैसला सुनाने से पहले काफी मेहनत करनी पड़ी होगी. कसाब के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त न्यायमित्र राजू रामचंद्रन ने फैसले के बाद कहा कि उन्होंने कसाब के मामले से संबंधित सभी बातें अदालत के सामने रखी. मगर अदालत के अंतिम फैसले से वह नतमस्तक हो गए हैं. कसाब के खिलाफ और महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए वकील उज्ज्वल निकम के मुताबिक इस फैसले ने लश्कर- ए- ताइबा के आतंकी रोल को रेखांकित कर दिया है. अब पाकिस्तानी अदालत को भी चाहिए कि वह 26/11 के दोषियों के खिलाफ जल्द फैसला सुनाए.

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