संगीतमय भजन का सातवां दिन

भोपाल, 25 मई. श्रीराम कथा सांई महोत्सव आज कथा की शुरूआत संगीतमय भजनों से हुई. सातवें दिवस की शुरूआत करते हुये साध्वी विश्वेश्वरी देवी ने कहाकि जीवन में शांति और शीतलता की आवश्यकता प्रत्येक व्यक्ति को है.

आज प्रत्येक व्यक्ति के अन्दर बढ़ता क्रोध चिन्ता का विषय है क्योंकि इस क्रोध से समाज में अनेक प्रकार की अराजकताएं एवं वैमन्स्यताएं पैदा हो रही है. जो सभी के लिए घातक है.
जितना हमारा जीवन सरल होगा उतनी ही शांति हमें प्राप्त होती जाएगी. संसार भर में मैत्री का भावन हमें शांति और प्रेम से भर देता है अत: किसी ेस भी बैर विरोध किए बगैर मित्रता युक्त व्यवहार करें. कथा मेंआज साध्वी जी ने भगवान श्रीराम एवं भरत मिलाप का वर्णन करते हुए बताया कि जिसके जीवन में भरतजी की तरह सरलता दीनता और सबका हित करने का भाव होता है वहीं भगवान के अतिथि होता है भरत ने अर्थ धर्म, काम और मोक्ष इन चारो पुरुषार्थ को छोड़कर भाग्वान का प्रेम मांगा, जीवन को ईश्वर प्रेम केलिए संसार के प्रत्येक पुरुषार्थ को  ठुकरा देना चाहिए.

श्री भरत की चित्रकूट यात्रा भोग से योग की ओर जाने वाली यात्रा थी. अयोध्या का राज्य वैभव सुख सुविधाएं मान, सम्मान सभी भरत को तुच्छ लगने लगा तो उन्होंने सब कुछ त्यागकर भगवान श्रीराम केदर्शन के लिए चित्रकुट की यात्रा की. जीवन को भी सांसारिक धन, वैभव, सुख सुविधाओं एवं मान सम्मान की चिंता न करते हुए भगवान की ओर चलना चाहिए. यही जीवन की पर मगत है. जब जीव भगवान की ओर चलता है तो उसके मार्ग में अनेक बाधाएं एवं विघ्र आते है किंतु श्री भरत की तरह जो अपने नियम में अडिग होकर चलते है तो विघ्र करने वाले शत्रु भी मित्र बनकर उनका सहयोग करने लगते है.

श्री भरत के साथ निशाद आदि भील लोग भी भगवान के दर्शन के लिए गए और परमानंद को प्राप्त किया. भगवान ने प्रसाद रूप में अपनी चरण पादुकाएं श्री भरत को दीं जिन्हें भगवान की विशेष कृपा मानकर भरत जी ने सिर पर धारण किया और चौदह वर्षो तक उन्हीं चरण पादुकाओं को राज्य मानक सम्पूर्ण राज्य व्यवस्था का संचालन किया. आज कथा स्थल पर चित्रकला प्रतियोगिता का आयोजन किया गया. जिसमें बालक बालिका एवं महिलाओं ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया. प्रतियोगिता के विजेताओं को 27 मई को पुरस्कृत किया जायेगा. कार्यक्रम के संयोजक श्री सुरजीत सिंह चौहान की सुपुत्री कु. सौम्या चौहान के जन्म दिवस के अवसर पर विशेष आशीर्वाद प्रदान किया.

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