मध्यप्रदेश में आंगनबाड़ी सबसे चर्चित और उपेक्षित विषय है. वे शासकीय कर्मचारी हैं या नहीं, यह भी प्रश्न बना हुआ है क्योंकि उन्हें जो भी रुपया दिया जाता है उसे वेतन नहीं बल्कि मानदेय कहा जाता है. कभी ऐसी ही विचित्र स्थिति गांव कोटवारों के बारे में भी रही है. ऐसी ही स्थिति इस बारे में भी बनी रहती है कि बच्चों को मध्यान्ह भोजन में क्या खिलाया जाए. पूर्व मुख्यमंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने बच्चों को दलिया दिया. बच्चे उसे खाते कम फेंकते ज्यादा थे. उनके बाद मुख्यमंत्री बनी साध्वी उमा भारती ने कहा कि दलिया में स्वाद नहीं होता बच्चों को पूरा भोजन दिया जाए. पर स्थिति अभी स्थिर नहीं हो पा रही है.

मुख्यमंत्री को इस बात के लिए धन्यवाद देना चाहिए कि उन्होंने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं तथा सहायकों के मानदेय में दुगनी वृद्धि कर दी है. अब कार्यकर्ता को अभी तक मिल रहे 15 सौ रुपये के स्थान पर 3 हजार प्रतिमाह और सहायिकाओं व उप आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को 750 रुपये के स्थान पर 1500 रुपये मिलेंगे. इस पर शासन के लगभग साढ़े बाइस करोड़ रुपये खर्च होंगे. साथ ही इन्हें दो-दो साडिय़ों के लिए साल में 400 रुपये दिए जाएंगे. आंगनबाडिय़ां बाल कल्याण के क्षेत्र में ग्राम स्तर तक बहुत बड़ी जिम्मेवारियां निभा रही हैं. इन्हें पूर्ण रूप से शासकीय कर्मचारी का दर्जा देना बहुत उपयुक्त होगा. इन्हें ग्रामीण स्तर पर बाल श्रमिक कुप्रथा के विरुद्ध भी कार्यवाही करने के लिए सक्षम्य बनाया जाए.

संस्थापक : स्व. रामगोपाल माहेश्वरी
प्रधान संपादक : श्री प्रफुल्ल माहेश्वरी

Related Posts: