आडवाणी ने कहा यूपीए सरकार अवैध

संसद में हंगामा, भाजपा नेता ने वापस लिए  अपने शब्द

नई दिल्ली, 8 अगस्त। संसद के मॉनसूत्र सत्र के पहले दिन असम हिंसा पर चर्चा के दौरान बीजेपी के सीनियर लीडर लालकृष्ण आडवाणी के यूपीए-2 सरकार को पैसों के बल पर बचाने के बयान पर हंगामा खड़ा हो गया।

आडवाणी के बयान पर यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी गुस्से से तमतमा गईं। उन्होंने आडवाणी के बयान का जोरदार तरीके से विरोध किया। सोनिया गांधी पहली बार सदन में इतने गुस्से में दिखीं। दरअसल, आडवाणी ने असम हिंसा पर चर्चा के बीच में अचानक कहा कि यूपीए-1 सरकार चुनाव जीतकर बनी, लेकिन यूपीए-2 सरकार को पैसे देकर बचाया गया। आडवाणी का इतना कहना था कि सदन में हंगामा शुरू हो गया।

हालांकि, बाद में आडवाणी ने अपना यह विवादित बयान वापस ले लिया। बाद में आडवाणी ने स्पष्ट किया कि उनका आशय जुलाई, 2008 के विश्वास मत को लेकर था, न कि 2009 के चुनाव से। बीजेपी नेता सुषमा स्वराज ने भी आडवाणी के इस बयान पर सफाई दी। उन्होंने कहा, आडवाणी ने यूपीए सरकार को असंवैधानिक नहीं कहा। उन्होंने यह बात स्वीकार भी की है।

उन्होंने अपना बयान 2008 के अविश्वास प्रस्ताव के संदर्भ में दिया था। संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने नियमों का हवाला देते हुए कहा कि श्री आडवाणी कार्यस्थगन प्रस्ताव के विषय से अलग दूसरे विषय पर नहीं बोल सकते. इस पर विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज ने कहा कि संसदीय कार्यमंत्री का यह कहना ठीक नहीं है कि श्री आडवाणी विषय से हट कर बोल रहे हैं. उन्होंने कहा कि श्री आडवाणी सरकार की असफलता गिना रहे हैं कि वह आर्थिक मोर्चे पर ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मोर्चे पर भी असफल रही है. उन्होंने अपनी गलती भी स्वीकार कर ली है कि वह 2009 के चुनाव के बारे में नहीं बल्कि 2008 के विश्वास प्रस्ताव पर हुए मतदान की बात कर रहे थे.

श्री बंसल ने कहा कि श्री आडवाणी अपनी टिप्पणी से संसदीय प्रणाली ही नहीं बल्कि लोकतंत्र की गरिमा भी गिरा रहे हैं. लोकसभा अध्यक्ष ने श्री आडवाणी से अपने शब्द वापस लेने का पुन. अनुरोध किया इस पर श्री आडवाणी ने कहा कि वह अपने शब्द वापस ले चुके हैं और स्पष्ट कर चुके हैं कि उन्होंने विश्वास प्रस्ताव के बारे में कहा था. इस पर सत्ता पक्ष के सदस्य फिर उत्तेजित हो गये और शोर शराबा करने लगे भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के सदस्य इसके जवाब में अपनी सीटों पर खडे होकर जोर जोर से बोलने लगे. कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी भी श्री आडवाणी की टिप्पणी से क्षुब्ध नजर आयी. उन्होंने हंगामे के दौरान संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल तथा मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल से भी बात की. करीब 20 मिनट तक हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही भोजनावकाश के लिए अपराह्न दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी.

कांग्रेस के भारी विरोध पर बयान से पलटे आडवाणी

नई दिल्ली, 8 अगस्त. भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी द्वारा संप्रग-2 को नाजायज करार देने से लोकसभा में आज खासा हंगामा हुआ और कांग्रेस के कड़े विरोध के चलते उन्हें अपने शब्द वापस लेने पड़े।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के नेतृत्व में पार्टी सदस्यों ने निचले सदन में आडवाणी की टिप्पणी के लिए उनकी कड़ी आलोचना की। बाद में आडवाणी ने कहा कि वह 2008 के विश्वास मत की बात कर रहे थे, जिसमें सरकार बचाने के लिए करोड़ों रूपये खर्च किये गये थे। आडवाणी ने असम में हिंसा पर कार्यस्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की शुरूआत करते हुए कहा कि संप्रग-2 नाजायज है। ऐसा भारत के इतिहास में कभी नहीं हुआ। वोट हासिल करने के लिए करोड़ों रूपये कभी नहीं खर्च किये गये। इस पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की।

नेता सदन सुशील कुमार शिन्दे ने चर्चा में हस्तक्षेप करते हुए कहा कि आडवाणी वरिष्ठ नेता हैं। हम सभी उनका सम्मान करते हैं लेकिन आज उन्होंने कहा कि 2009 का समूचा चुनाव नाजायज था। ‘ यह हम सबका अपमान है। मुझे लगता है कि उन्हें अपने शब्द वापस लेने चाहिए।’ लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने भी आडवाणी को याद दिलाया कि उन्होंने कार्यस्थगन प्रस्ताव इसलिए मंजूर किया क्योंकि असम के हालात को लेकर लोग चिन्तित हैं। ‘ लेकिन आपने जो एक शब्द कहा, उससे हर किसी की भावना आहत हुई है। यदि आप चाहें तो इस शब्द को वापस ले सकते हैं।’

32 गैर सरकारी संगठनों के खातों पर रोक

नई दिल्ली, 8 अगस्त. सरकार ने आज यहां बताया कि 32 गैर सरकारी संगठनों के खातों पर रोक लगा दी गई है तथा 72 गैर सरकारी संगठनों को विदेशी अनुदान लेने से रोका गया है।

गृह राज्य मंत्री मुल्लापल्ली रामचंद्रन ने आज राज्यसभा को बताया कि गैर सरकारी संगठनों द्वारा तय प्रयोजन से विभिन्न उद्देश्य के लिए निधियों का उपयोग किए जाने संबंधी मामलों की जांच की जा रही है। ऐसे 24 मामले सीबीआई को जांच के लिए सौंपे गए हैं तथा दस मामले राज्य पुलिस को दिए गए हैं और 35 गैर सरकारी संगठनों को पूर्व अनुमति श्रेणी में रखा गया है। उन्होंने भूपेंद्र यादव के प्रश्न के लिखित उत्तर में बताया कि 32 गैर सरकारी संगठनों के खातों पर रोक लगा दी गई है, 72 गैर सरकारी संगठनों को विदेशी अनुदान लेने से रोका गया है और 4349 गैर सरकारी संगठनों का पंजीकरण रद्द कर दिया गया है।

सरकार सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार

संसद के मानसून सत्र के पहले दिन आज प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार संसद के नियमों और परंपराओं के अनुरूप किसी भी विषय पर बहस कराने के लिए तैयार है और साथ ही उम्मीद जताई कि विपक्ष दोनों सदनों में सरकारी कामकाज को पूरा करने में हर संभव सहयोग देगा . संसद की इमारत के भीतर प्रवेश करने से पहले संवाददाताओं से बात करते हुए उन्होंने कहा ,’हमारी सरकार किसी भी मुद्दे पर संसद के नियमों और परंपराओं के अनुरूप बहस कराने के लिए तैयार है .

‘असम में जातीय हिंसा के मामले को लेकर भाजपा की ओर से कार्यस्थगन प्रस्ताव लाए जाने की संभावना के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा ,’हम संसद को बहस का मंच मानते हैं.’ उन्होंने कहा कि असम की हिंसा के बारे में उनके बयान का फैसला इस बात पर निर्भर करेगा कि संसद में क्या कुछ होता है . सिंह ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि सभी दल मानसून सत्र के दौरान दोनों सदनों के कामकाज को सहज ढंग से चलाने में सरकार का सहयोग करेंगे .

वे जानते हैं क्या कह रहे हैं

केंद्र सरकार के बारे में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवाणी की टिप्पणी की कांग्रेस नेताओं ने जहां कडी आलोचना की वहीं पार्टी महासचिव राहुल गांधी ने इस पर संयमित प्रतिक्रिया व्यक्त की. राहुल ने कहा कि श्री आडवाणी वरिष्ठ व्यक्ति हैं. वह जानते हैं कि वह क्या कह रहे हैं. इस पर वह कोई टिप्पणी नहीं करना चाहते.

विश्लेषण

सोनिया की सख्ती से नया जोश

नई दिल्ली, 8 अगस्त. संप्रग सरकार पर लगातार शब्दवार करने वाली भाजपा को मनसून सत्र के पहले दिन ही संप्रग की मुखिया सोनिया गांधी के सख्त तेवरों से दो-चार होना पड़ा. इतना ही नहीं श्रीमती गांधी ने तेलंगाना मुद्दे पर लगातार संसद में गतिरोध उत्पन्न करने वाले अपने सांसदों पर सख्ती दिखाकर पार्टी के अंदर भी सख्त संदेश दिया है. श्रीमती गांधी के इस तेवर को देखकर यह कहा जाने लगा है कि अब सरकार व संगठन के काम करने के अंदाज में आक्रामकता आएगी.

शांत व शालिन स्वभाव की श्रीमती गांधी ने आज संसद के अंदर संभवत: पहली बार सख्त तेवर के साथ योजनाबद्घ ढंग से भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी को घेर कर न सिर्फ उनको अपने शब्द वापस लेने को मजबूर किया बल्कि विपक्ष की आक्रमक राजनीति पर पानी डाल दिया. श्रीमती गांधी बिल्कुल नए तेवर के साथ विपक्ष के खिलाफ मोर्चाबंदी करते हुए कांगे्रसी सदस्यों को आक्रामक होने की प्रेरणा दी. असम हिंसा पर हो रही चर्चा के दौरान जैसे ही श्री आडवाणी ने संप्रग-दो सरकार को अवैध करार दिया वैसे ही श्रीमती गांधी ने बिना समय गवाए उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया. उन्होंने न सिर्फ संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल को बल्कि नेता सदन व गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे व केन्द्रीय मंत्री कपिल सिब्बल को बयान की गंभीरता के बारे में प्रेरित किया. उसके बाद उन्होंने कांगे्रसी सदस्यों की ओर इशारा करके एक स्वर में विपक्ष पर दबाव बनवाया. श्रीमती गांधी के इस रुख से न सिर्फ विपक्षी सदस्यों में खलबली मच गई बल्कि संप्रग के सहयोगी दलों के सदस्य भी हैरान होकर संप्रग की एकजुटता दिखाने में लग गए.

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