वर्तमान संसद सत्र में ही लोकपाल विधेयक आ रहा है. विधेयक पर स्थाई समिति की रिपोर्ट पेश की जा चुकी है. इस पर केबिनेट और संसद दोनों विचार करेंगी. इस समय अन्ना इस बात को मुद्दा बना रहे हैं कि विधेयक में किसको रखा जायेगा और किसे नहीं. सरकार की ओर से श्री नारायण स्वामी ने कहा है कि विधेयक पर समिति की रिपोर्ट में अभी और परिवर्तन आ सकते हैं. समिति ने स्वयं प्रधानमंत्री को दायरे में लाने के प्रश्न पर फैसला संसद पर छोड़ा है. जैसा कि हर समिति में होता है इस समिति में भी कुछ सदस्यों ने विमति दी है.

इस समय यह प्रतीत हो रहा है कि अन्ना का लोकपाल के मसले पर एजेंडा राजनैतिक व चुनावी है. उन्होंने विपक्ष की पार्टियों को सांकेतिक अनशन के दिन अपने से जोडऩे का प्रयास किया है. वहां अन्ना को दलों के सुझाव झेलने पड़े. श्री ए.बी. वर्धन ने कहा राजनैतिक दलों के अस्तित्व को उन्हें स्वीकार करना पड़ेगा. अन्ना को भी कहना पड़ा कि दलों में भी अच्छे लोग हैं. अन्य सभी नेताओं ने अन्ना को बता दिया कि जैसा वह चाहते सिर्फ वैसा ही है, विधेयक बनेगा यह संभव नहीं है. विधेयक वैसा ही बनेगा जैसा संसद चाहेगी. अन्ना का इन दिनों श्री राहुल गांधी को लक्ष्य करना राजनैतिक लग रहा है. हर पार्टी में उनके नेताओं को सुना जाता है. अन्ना टीम में भी अन्ना के निर्णय होते हैं. इसी तरह श्री गांधी कांग्रेस के सांसद व महामंत्री हैं. वहां उनकी बात सुनी जा रही है. इसमें अन्ना को ऐतराज क्यों होना चाहिए. इसमें श्री अन्ना का राजनैतिक एजेंडा लग रहा है. उत्तर प्रदेश में चुनाव फरवरी में होने जा रहे हैं. वहां कांग्रेस की कमान श्री राहुल गांधी के हाथों में है. श्री हजारे कह चुके हैं कि यदि वे लोकपाल विधेयक पर सहमत नहीं हुए तो चुनावों में कांग्रेस के विरुद्ध प्रचार करेंगे. संभावना यह बन रही है कि श्री अन्ना लोकपाल की आड़ में कोई असहमति का मुद्दा बना कर उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में प्रचार में कूदेंगे. वे विपक्ष का एक मोर्चा बनाना चाहते हैं और उसका नेतृत्व सम्हालेंगे.

उत्तर प्रदेश में स्थिति ऐसी बन रही है कि वहां सत्ता में तो बहुजन समाज पार्टी सरकार व मुख्यमंत्री मायावती हैं. उसके टक्कर देने में प्रमुख स्थान बनाने में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी व भारतीय जनता पार्टी में राजनैतिक प्रतिस्पर्धा चल रही है. इसमें श्री राहुल गांधी के कारण कांग्रेस आगे चलती दिख रही है. श्री हजारे इसी पृष्ठभूमि में श्री राहुल गांधी को अभी से लोकपाल विधेयक पर टारगेट बना रहे हैं ताकि वह वहां चुनाव में जाकर उन्हें सीधा लक्ष्य कर सकें. कांग्रेस के महामंत्री श्री दिग्विजय सिंह ने अनुमान लगाया है कि विपक्ष की मुख्य पार्टी भारतीय जनता पार्टी व उनके समर्थक राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की चुनावी राजनीति के तहत एक श्रृंखला में पहले बाबा रामदेव, फिर अन्ना हजारे और उनके बाद श्री श्री रविशंकर महाराज भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर परोक्ष रूप से चुनावी राजनीति में आए हैं. भाजपा नेता श्री आडवानी ने भी इस बार उनकी रथ यात्रा का मुद्दा भ्रष्टाचार रखा था, लेकिन अन्ना हजारे अभी तक गांधी जी या जयप्रकाश नारायण की बुलंदियों तक पहुंच पाये हैं. अभी विपक्ष के दलों ने उन्हें अपना सर्वमान्य नेता भी नहीं माना है.

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