नई दिल्ली, 1 मई. पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों को बड़ी राहत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आज उनकी दया याचिका संबंधी केस को तमिलनाडु से बाहर चलाए जाने को मंजूरी दे दी. यह अर्जी हत्या के तीन दोषियों मुरुगण, सन्थान और अविरू ने दी थी. सुप्रीम कोर्ट तीनों की दया याचिकाओं को पहले ही खारिज कर चुका है.

इस मामले में एक वकील ने याचिका दायर कर ये मांग की है कि इस मुकदमे को मद्रास हाईकोर्ट से कहीं और ट्रांसफर कर दिया जाए. दरअसल मद्रास हाईकोर्ट में इस बात पर बहस हो रही है कि राजीव गांधी के हत्यारों मुरुगण, सन्थान और अविरू की फांसी की सजा को उम्र कैद में तब्दील कर दिया जाए. राजीव गांधी हत्याकांड के आरोपियों ने तमिलनाडु में मामले की सुनवाई पर आपत्ति जताई थी. कोर्ट ने राजीव गाधी के हत्यारों के आग्रह पर सुनवाई करने का फैसला किया है. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि मामला उसके पास स्थानांतरित किया जाए.

सेना ही तय करे सुनवाई कैसे हो
उच्चतम न्यायालय ने सेना अधिकारियों से यह तय करने को कहा है कि क्या जम्मू कश्मीर और असम में फर्जी मुठभेड़ में लोगों को मार डालने के आरोपी, उसके अधिकारियों के खिलाफ सुनवाई नियमित आपराधिक अदालतों में की जानी चाहिए या उनके खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई होनी चाहिए. न्यायमूर्ति बी एस चौहान और न्यायमूर्ति स्वतंत्र कुमार की बेंच ने कहा कि अगर सेना के अधिकारी कोर्ट मार्शल की कार्रवाई नहीं चाहते तो सीबीआई केंद्र से सैन्यकर्मियों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति मांग सकती है. कुछ सैन्य अधिकारियों पर, जम्मू कश्मीर के पथरीबाल में 12 साल पहले एक कथित सुनियोजित गोलीबारी में सात लोगों को मार डालने के मामले में, लिप्त होने का आरोप है. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि अगर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ नियमित आपराधिक अदालतों में मुकदमा चलाया जाता है तो केंद्र को मुकदमा चलाने के लिए सीबीआई के आग्रह पर, तीन माह के अंदर विचार करना चाहिए.

पीठ ने अपना फैसला 23 अप्रैल तक सुरक्षित रख लिया. इससे पहले, जिरह समाप्त करते हुए अडिशनल सॉलिसिटर जनरल हरिन रावल और सीबीआई की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक भान ने दोहराया कि कथित फर्जी मुठभेड़ में लिप्त सैन्य अधिकारियों को अभियोजन से छूट नहीं है. सीबीआई ने पूर्व में विशेष पीठ से कहा था कि यह सोच समझ कर की गई हत्या का मामला है और आरोपी अधिकारी कठोर सजा के हकदार हैं.

Related Posts: