संस्कृति मंत्री द्वारा राजा रवि वर्मा आदरांजलि समूह चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ

भोपाल, 29 अप्रैल. संस्कृति मंत्री लक्ष्मीकान्त शर्मा ने कहा है कि मध्यप्रदेश की पहचान सारे देश में सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में जानी जाती है. राष्ट्रीय स्तर की इस प्रदर्शनी से मध्यप्रदेश के चित्रकारों की पहचान सारे देश में हो सकेगी. संस्कृति मंत्री शर्मा आज भारत भवन में राजा रवि वर्मा आदरांजलि समूह चित्र प्रदर्शनी का शुभारंभ कर रहे थे.

शर्मा ने पिछले पाँच वर्ष से निरंतर राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी के आयोजन पर प्रसन्नता व्यक्त की. उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी के आयोजन के लिये भविष्य में हरसंभव मदद दी जायेगी. संस्कृति मंत्री शर्मा ने प्रसिद्ध चित्रकार हरचंदन सिंह भट्टी को चित्रकला में उनके योगदान के लिये सम्मानित किया. सम्मान स्वरूप 21 हजार की राशि भेंट की गई. राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में चित्रकारों ने जीवन के विविध आयामों को अपनी कला के जरिये बेहतर तरीके से उकेरा है. चित्रकारों ने नारी शक्ति, ईश्वर आराधना, प्रकृति की अनुपम छटा को चित्रों में प्रदर्शित किया है.

संस्था के अध्यक्ष कैलाश तिवारी ने बताया कि सन् 2008 में भोपाल के कलाकारों की कृतियों के छोटे से प्रयास के रूप में आरंभ हुआ यह सफर मात्र पाँच वर्ष में राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी तक आ पहुँचा है. उन्होंने बताया कि इस वर्ष की प्रदर्शनी के लिये कई राज्यों से प्रविष्टियाँ प्राप्त हुई थीं. इनमें से चयनित 87 प्रविष्टियों को प्रदर्शित किया गया है. निर्णायकों ने इन कृतियों में से तीन कृतियों को 11 हजार के राजा रवि वर्मा पुरस्कार से पुरस्कृत किये जाने के लिये चुना. जिन्हें यह पुरस्कार दिया गया है, उनमें शंकर शिंदे इंदौर, मिथलेश कुमार साहू राजनांदगाँव, श्रीमती अलका मनीष पाठक आष्टा हैं. विश्व नृत्य दिवस पर आकर्षक प्रस्तुतियाँ
संस्कृति मंत्री शर्मा ने विश्व नृत्य दिवस के मौके पर अपने उदबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति में नृत्य की विशिष्ट पहचान रही है. नृत्य का ईश्वर की आराधना में प्राचीन काल से उपयोग होता रहा है. उन्होंने सभी कलाकारों को दिवस की बधाई दी. शर्मा ने नृत्य गुरू कार्तिक राम के चित्र पर माल्यार्पण किया. इस मौके पर पंडित रामलाल का नृत्य के क्षेत्र दिये गये उल्लेखनीय योगदान के लिये सम्मान किया गया. सुश्री बी. अनुराधा सिंह ने कत्थक नृत्य प्रस्तुतियाँ दी.

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