अभी वर्षा ऋतु चल रही है. कहीं अधिक कहीं अल्प वर्षा की खबरें आ रही हैं. फसलों के अनुमान भी लगातार परिवर्तित हो रहे हैं. कुछ समय पूर्व केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शरद पवार व प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान सूखे जैसी स्थिति की ओर इंगित कर रहे थे. अब यह अनुमान लग रहे हैं कि अति वर्षा से फसल नष्टï हो रही है. इस समय यह दोनों ही अनुमान व्यर्थ की दिमागी कसरत हैं. किसी मौसम के परिणामों का अनुमान उसके पूरा हो जाने के बाद ही संभव और निश्चित हो पाता है. वही स्थिति अभी भी बनी हुई है.

मध्यप्रदेश देश में सोयाबीन उत्पादन में देश का प्रथम राज्य है. इस राज्य की कृषि व्यवस्था और अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका है. यह देश का प्रमुख खाद्य तेल बन गया है. औद्योगिक क्षेत्र में सोया तेल के बड़े-बड़े कारखाने लग गए हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार 17 अगस्त तक देश में 160 लाख हेक्टेयर में सोयाबीन की बुवाई हो चुकी है. पिछले साल इसी अवधि में यह 167.3 लाख हेक्टेयर में बोयी जा चुकी थी. दोनों सालों के बीच में अंतर कोई बहुत ज्यादा नहीं है. आमतौर पर इतनी घट-बढ़ होती रहती है.

अग्रिम सौदा करने वाले (सट्टा बाजार) ऐसे ही मामले घट-बढ़ का अनुमान लगाकर सोया व्यापार में भाव बढ़ाने में लग गए हैं. सोयाबीन आगामी अक्टूबर का वायदा 1.59 प्रतिशत से बढ़कर 4000 रुपये क्विंटल पहुंच गया है. इस तेजी पर अंकुश लगाने के लिए कमोडियी मार्केट रेग्युलेटर संस्था फारवर्ड मार्केट्स कमीशन (एफ.एस.सी.) ने आगामी वर्ष अगस्त 2013 के लिए सोयाबीन के अनुबंध प्रारंभ करने की अनुमति न देने का फैसला किया है. मध्यप्रदेश में अभी तक कहीं बहुत ज्यादा जल भराव में सोयाबीन की खेती को संभवत: कुछ नुकसान हुआ होगा अन्यथा अभी इस फसल के बारे में पूर्व अनुमान वास्तविकता से दूर है.

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