वकील, डॉक्टर, इंजीनियर, व्यापारी सम्पन्न और बौद्धिक रोजगार माने जाते हैं. ये वर्ग समाज का नेतृत्व करते आये हैं. थोड़ी हैरानी होती है कि मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इन्हें भी ‘उठाने व जमाने’ के लिये शासकीय सुविधाओं व आर्थिक मदद का पात्र माना है. आजादी की लड़ाई में महात्मा गांधी, पंडित मोतीलाल नेहरू, पंडित जवाहर लाल नेहरू, श्री वल्लभभाई पटेल, डाक्टर अम्बेडकर, मोहम्मद अली जिन्ना, डाक्टर कैलाशनाथ काटजू, श्री राजगोपालाचारी और ‘ढेर सारे’ वकील ही इस देश के नेता रहे हैं.

इनके नोटरी, पिटीशन राइटर और मुंशी तक सम्पन्न वर्ग माने जाते हैं. नानी पालखीवाला, राम जेठमलानी, कपिल सिब्बल कानूनी हस्तियां हैं. अधिकांश वकील आयकर दाता होते हैं.
मुख्यमंत्री की वकील पंचायत से ऐसा और सहसा प्रगट हो रहा है कि सामाजिक विकास के इस बढ़ते युग में वकील वर्ग पिछड़ गया है. जिनका पेशा ही दूसरों की सहायता करना है, उन्हें ही अब शासकीय सहायता की जरूरत पड़ रही है. नये वकीलों को कार्यालय शुरु करने के लिये राज्य सरकार एकमुश्त 12 हजार रुपयों की आर्थिक सहायता देगी. वैसे व्यवहार में नया वकील किसी वरिष्ठï वकील का ‘जूनियरÓ बनकर काम शुरू करता है और उसकी मदद से कमाता खाता है. जम जाने पर वह अपना खुद का स्वतंत्र काम करता है. लगभग अधिकांश वकील जीवन बीमा कराते हैं या कराने की हैसियत में होते हैं. फिर भी दयालु मुख्यमंत्री ने यह घोषणा भी कर दी कि वकील के मरने पर उसके परिवार को एक लाख रुपये की मदद दी जायेगी.

अभी बार कौंसिल एक लाख रुपये की मदद देती ही है. अभिभाषक… संघों को बिजली के बिल में एक सीमा तक भुगतान राज्य सरकार द्वारा किया जायेगा. इसे सब्सिडी ही माना जाये. मुख्यमंत्री ने आव्हान किया है कि अच्छी तर्कशक्ति वाले देशभक्त वकील राजनीति में आये जबकि वकील शुरू से ही राजनीति में डटे हुए हैं और नेतृत्व उनके हाथों
में हैं.

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