ऐसे अवसर कम ही आते हैं, जब फिल्म देखने के बाद फिल्म के संवाद लेखक के बारे में जानने की उत्सुकता बढ़े. लेकिन वर्ष 2011 की बेहद चर्चित फिल्म द डर्टी पिक्चर में जितनी तारीफ़  विद्या बालन के अभिनय की हो रही है, उतनी ही सराहना हो रही है फिल्म के संवाद लेखक रजत अरोड़ा की वन लाइनर व प्रभावशाली संवाद लिखने में माहिर रजत मानते हैं कि लेखकों के लिए बॉलीवुड का यह सबसे बेहतरीन वक्त है.

दी डर्टी पिक्चर देखकर जब दर्शक थियेटर से बाहर निकले, तो उनकी जुबां पर फिल्म के संवादों ने राज कर लिया था. अगले ही दिन फेसबुक पर कई यूजर ने डर्टी पिक्चर के संवाद को पोस्ट किया या अपना स्टेटस अपडेट बना लिया. अखबारों से लेकर, इंटरनेट, न्यूज चैनल, एफ एम रेडियो यहां तक कि लोगों ने आपस में बातचीत के दौरान भी फि़ ल्मों के कई लोकप्रिय संवादों को दोहराया. एक संवाद लेखक के लिए इससे बड़ी  सफलता और क्या होगी. फिल्म में विद्या बालन के अभिनय के साथ हर तरफ़  फिल्म के संवाद लेखक रजत अरोड़ा की चर्चा हो रही थी. वजह यह थी कि कई वर्षो बाद किसी हिंदी फिल्म में एक साथ कई संवाद दर्शकों को पसंद आये. उन संवादों में चंचलता भी थी लेकिन भावनाओं के साथ. यह कमाल कर दिखाया था. यूं तो कई फिल्मों की कहानी लिख चुके हैं और उनसे उन्हें सफलता भी मिली.

लेकिन उन्हें स्थापित द डर्टी पिक्चर ने किया है. रजत मानते हैं कि यह बॉलीवुड का सबसे बेहतरीन समय है, क्योंकि अब जो काम करेगा, उसे नाम मिलेगा ही. आखिर आज लेखकों को तवज्जो दी जा रही है, तभी तो आपने मुझसे बातचीत करना मुनासिब समझा. वे बताते हैं कि वाकई डर्टी पिक्चर के लिए कहानी लिखना व संवाद लिखना एक चुनौती थी. विषय के साथ इस बात का ख्याल रखना था कि फिल्म फूहड़ न हो और न ही संवाद. मैंने डर्टी पिक्चर लिखते वक्त इस बात का पूरा ख्याल रखा कि सिल्क.सी लड़की अगर नायिका बनने का ख्वाब देखती है, तो उसके रास्ते में किस तरह की परिस्थितियां आयी होंगी. बकौल रजत मैं फिल्म की कहानी लिखते वक्त सिर्फ  रिसर्च को तवज्जो नहीं देता. कहानी में परिस्थिति, किरदार, उस किरदार को निभा रहे कलाकार, सबकुछ महत्व रखता है. फिल्म देखने के बाद कई लोगों ने कहा कि फिल्म में संवाद ईल थे. लेकिन गौर करने वाली बात यह है कि इस फि़ ल्म में बिना किसी गाली जैसे शब्द के इस्तेमाल के पूरी कहानी गढ़ी गयी है. रजत बताते हैं कि संवाद कहानी के किरदार और उसकी डिमांड के अनुसार ही लिखे जाते हैं. अब अगर कहानी सिल्क की है, तो उसके व्यक्तित्व के अनुसार ही संवाद लिखे जाने चाहिए. इसलिए, इसे ईल नहीं कहा जाना चाहिए. रजत खुश हैं कि हिंदी सिनेमा में फि़र से संवादों को तवज्जो दी जा रही है. फिलवक्त रजत वन्स अपॉन टाइम इन मुंबई के सीक्वेल पर काम कर रहे है. रजत सलीम जावेद को अपना आदर्श मानते है. दिल्ली से संबंध रखने वाले रजत वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई, चांदनी चौक टू चाइना, टैक्सी नंबर नौ दो ग्यारह, ब्लफ मास्टर जैसी फि़ल्मों की पटकथा और संवाद लिख चुके हैं. उन्होंने डर्टी पिक्चर के लिए गीत भी लिखे हैं.

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