सिडनी, 4 दिसंबर. आस्ट्रेलिया की सत्तारूढ़ लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लंबे समय से लगा प्रतिबंध हटाने के प्रधानमंत्री जूलिया गिलार्ड के साहसिक कदम का समर्थन किया. इसके बाद दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों के रास्ते की एक बड़ी रुकावट दूर हो जाएगी.

लेबर पार्टी ने भारत को यूरेनियम बेचने पर लगी रोक को हटाने के पक्ष में आज मतदान किया, जिससे परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं करने वाले देशों को भी यूरेनियम निर्यात करने का रास्ता साफ हो गया. भारत ने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किया है. सिडनी में लेबर पार्टी के 46वें राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान 206 प्रतिनिधियों ने भारत को यूरेनियम निर्यात किए जाने के पक्ष में मतदान किया, जबकि 185 प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान किया. भारत को यूरेनियम की बिक्री का विरोध करने वालों ने जापान में मार्च में शक्तिशाली भूकंप और सुनामी के कारण उत्पन्न फुकुशिमा परमाणु आपदा का हवाला दिया.

वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री गिलार्ड ने कहा कि इस कदम से व्यापार को बढ़ावा देने और भारत के साथ आस्ट्रेलिया के संबंधों को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी. उन्होंने कहा, हम विश्व इतिहास के इस महत्वपूर्ण क्षण में सही मौके का लाभ लेना चाहते हैं. ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री ने कहा, हमे यह सुनिश्चित करने की जरूरत है कि इस क्षेत्र में हम विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र भारत समेत सभी के साथ मजबूत से मजबूत संबंध बनाएं. उन्होंने कहा कि यह गलत है कि हम चीन को यूरेनियम बेचें लेकिन भारत को नहीं. गिलार्ड ने कहा, हम वह राजनीतिक दल नहीं है जो कड़े फैसले लेने में हिचकिचाएं. इस सम्मेलन में राष्ट्रीय हित के मद्देनजर हमें यह फैसला करना चाहिए. आस्ट्रेलिया की प्रधानमंत्री ने दलील दी कि ऑस्ट्रेलिया भारत को परमाणु अप्रसार संधि की बाध्यताओं का उल्लंघन किए बिना यूरेनियम बेच सकता है. उन्होंने कहा कि भारत को यूरेनियम बेचने संबंधी किसी भी समझौते में न्यूनतम प्रसार के खतरे से बचाव के कड़े उपाय होंगे. गिलार्ड ने कहा कि हमें यह सच स्वीकार करना होगा कि अगर हम भारत को यूरेनियम बेचने से इंकार कर देते हैं तो इसका मतलब यह नहीं है कि भारत अपने परमाणु कार्यक्रम को आगे न बढ़ाने का फैसला कर लेगा.

भारत को यूरेनियम के निर्यात की नीति में आए इस बदलाव से पहले काफी गर्मा-गरम बहस हुई. इस फैसले में संसाधन मंत्री मार्टिन फ?ग्र्युसन, रक्षा मंत्री स्टिफन स्मिथ और जे.वेदरिल ने प्रधानमंत्री गिलार्ड का समर्थन किया. सभी ने चीन को यूरेनियम बेचने और भारत को इसके लिए इंकार करने को तर्कसंगत नहीं बताया. हालाकि परिवहन मंत्री एंथनी अल्बानीज समेत गिलार्ड के कुछ मंत्रियों ने उनके फैसले का विरोध किया. खुद गिलार्ड की पार्टी के स्टीफन कोनरॉय, तान्या प्लाईबरसेक और पीटर गेरेट ने भी इसका विरोध किया. मतदान से पहले गेरेट ने कहा कि भारत को यूरेनियम बेचना बहुत खतरनाक है क्योंकि उसने परमाणु अप्रसार संधि पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं. लेबर सीनेटर डाउग कैमरॅन ने उन्हें गलत कहते हुए रोजगारों की खातिर सभी तर्कों को भूलने की सलाह दी. संघीय अवसंरचना मंत्री एंथनी अल्बानेज ने इस कदम का विरोध करते हुए कहा फुकुशिमा परमाणु त्रासदी के नौ माह बीते हैं और अभी हमें हमारे यूरेनियम निर्यात का विस्तार नहीं करना चाहिए. इस फैसले से पहले सिडनी के डार्लिंग हार्बर कनवेंशन सेंटर के बाहर लोगों ने यूरेनियम के विरोध में प्रदर्शन किया और बैठक खत्म होने से पहले उन्हें वहा से हटा दिया गया. गौरतलब है कि पूर्व प्रधानमंत्री जॉन हावर्ड ने वर्ष 2007 में भारत को यूरेनियम बेचने की अनुमति दे दी थी. लेकिन उसी वर्ष प्रधानमंत्री बने केविन रड ने इस फैसले को पलट दिया था. विश्व के यूरेनियम भडार का 40 फीसदी हिस्सा ऑस्ट्रेलिया के पास है.

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