नई दिल्ली, 30 अगस्त. हॉकी इंडिया ने लंदन ओलंपिक में भारतीय टीम के निराशाजनक प्रदर्शन की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए ऐलान किया था कि एक हाई परफारमेंस मैनेजर नियुक्त किया जाएगा लेकिन इसके अगले गुरुवार को हॉकी के दूसरे धड़े भारतीय हाकी महासंघ के साथ-साथ कई पूर्व ओलंपियनों ने हॉकी इंडिया के महासचिव नरेन्द्र बत्रा के इस्तीफे की ही मांग कर डाली.

आईएचएफ के अध्यक्ष आर के शेट्टी, पूर्व अध्यक्ष एवं सलाहकार केपीएस गिल, सचिव अशोक माथुर, पूर्व ओलंपियन एन पी गणेश, धनराज पिल्लै., जोआकिम कारवाल्हो, रोमियो जेम्स, एमपी सिंह, द्रोणाचार्य बने हरेन्द्र सिंह और पूर्व कप्तान राजपाल सिंह ने हॉकी इंडिया की जमकर आलोचना करते हुए कहा कि इसके कर्ताधर्ता बत्रा को अपने पद पर बने रहने का कोई अधिकार नहीं है.

आईएचएफ ने बत्रा का इस्तीफा मांगने के साथ-साथ यह मांग भी उठायी कि टीम के विदेशी कोच आस्ट्रेलिया के माइकल नोब्स की भी छुट्टी की जाए. हालांकि हाकी इंडिया के महासचिव नरेन्द्र बत्रा ने कल अपनी कान्फ्रेंस में नोब्स को बनाए रखने की बात कही थी और साथ ही कहा था कि भारतीय हाकी में सुधार के लिए यूरोप की तर्ज पर हाई परफारमेंस मैनेजर नियुक्त किया जाएगा. भारत लंदन ओलंपिक में 12वें और अंतिम स्थान पर रहा था. गिल ने अपने चिर परिचित अंदाज में कहा कि बत्रा अब यह घोषणाएं कर एक बार फिर देशवासियों को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि बत्रा एंड कंपनी ने देश के साथ गद्दारी की और वल्र्ड सीरीज हॉकी में खेलने वाले खिलाडिय़ों को देश के लिए खेलने से दूर कर दिया.

इसका नुकसान यह हुआ कि भारतीय टीम ओलंपिक में अपने सभी मैच हारकर आखिरी स्थान पर रह गयी. गिल ने सवाल उठाया कि इतना सब कुछ हो जाने के बाद बत्रा किस मुंह से भारतीय हॉकी को फिर से पटरी पर लाने की बात कह रहे हैं. भारतीय हॉकी को तो उन्होंने सिरे से ही बर्बाद कर दिया. पूर्व ओलंपियनों ने खेल मंत्रालय से ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए कहा कि जब तक दोनों धड़ों को मिलाया नहीं जाएगा तब तक भारतीय हॉकी की यही दुर्दशा रहेगी. एमपी गणेश और एमपी सिंह ने संवाददाता सम्मेलन में ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली भारतीय टीम को दोयम दर्जे की टीम बताते हुए कहा कि यह टीम सिर्फ हॉकी इंडिया का जुगाड़ थी और इसमें कोई राष्ट्रीय प्रतिनिधित्व नहीं है. गणेश ने आस्ट्रेलियाई कोच नोब्स पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक महिला कोच को राष्ट्रीय कोच बनाने का परिणाम यही निकलना था.

पूर्व भारतीय कप्तान और देश के सबसे सफल फारवर्डों में से एक धनराज पिल्लै तो सिरे से ही उखड़े हुए थे. उन्होंने कहा किस तरह राजपाल सिंह, प्रभजोत सिंह, अर्जुन हलप्पा, मंजीत कुल्लू और रोशन मिंज जैसे खिलाडिय़ों की अनदेखी की जा सकती है. इनका कसूर सिर्फ यही था कि इन्होंने वल्र्ड सीरीज हाकी में हिस्सा लिया था. इस तरह अनदेखी कर आप भारतीय हॉकी की हत्या ही कर देंगे. विश्वकप और राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय टीम के कप्तान रहे राजपाल ने तो यहां तक कह डाला कि यह एक साजिश थी जिसके तहत उन्हें ओलंपिक से दूर रखा गया. पूर्व ओलंपियनों ने कहा कि टीम के चयन में धांधली हुई थी और चहेते खिलाडिय़ों को शामिल किया गया था. उन्होंने मांग की कि हॉकी इंडिया पर सख्त कार्रवाई की जाए.

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