नई दिल्ली, 5 दिसंबर. देश के इतिहास में पहली बार महिला सुप्रीम कमांडर के रूप में राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल सोमवार को सैन्य वेशभूषा में टैंक पर सवार होकर रणबांकुरों से सजी उस रणभूमि में पहुंच गईं, जहां इस सदी का सेना का सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास सुदर्शन शक्ति चल रहा है।

आकाश से हमलावर हेलीकाप्टरों की गोलाबारी और टैंकों तथा तोपों की गर्जनाओं के बीच राष्ट्रपति ने सेना के रणबांकुरों द्वारा दुश्मन के ठिकानों पर भारत का परचम लहराए जाते देखा। इस अभ्यास में सेना की 21 कोर के 60,000 सैनिक, कई टैंक, बख्तरबंद वाहन और तोप है। राष्ट्रपति हेलीकॉप्टर से थार रेगिस्तान में उतरीं और उन्हें वहां से टी-90 टैंक के जरिए मौके पर ले जाया गया जहां दुश्मन की एक कंपनी ने करीब 50 बंकरों के साथ कब्जा जमाया हुआ था। टैंक सैनिकों की काली वर्दी पहने राष्ट्रपति पाटिल ग्रैंड स्टैंड पहुंची जहां उन्हें सामने करीब 200 किलोमीटर में फैले युद्वाभ्यास के मोर्चे की जानकारी दी गई। इसके बाद उन्होंने सेना ने मैकेनाइज्ड प्रभुत्व वाले हमले का नजारा देखा। इसमें हेलीकॉप्टर से विशेष बलों को दुश्मन के ठीक सामने उतार दिया गया जिन्होंने घातक हमला करते हुए बंकरों पर चढ़ाई कर दी।इसके बाद बोफोर्स तोप, स्मिर्च रोकेट लांचरों और पिनाका गनबैटल सिस्टम से आग उगलनी शुरू हो गई।  थार का यह इलाका इसके बाद भयंकर गोलाबारी से गूंज उठा।

यह संयोग की बात है कि भारत 1971 के युद्ध की 40वीं वर्षगांठ आज से दस दिन बाद ही पूरी करने वाला है और दुश्मन की उस समय हुई पराजय का खुमार आज भी यहां साफ महसूस हो रहा था। भारतीय सेना ने वायु सेना की हवाई शक्ति के तालमेल से सुदर्शन शक्ति अभ्यास डिजिटल युद्ध के वातावरण में किया है। इसमें सेना ने दुश्मन की भूमि में गहराई तक धंसकर वार करने की क्षमता को जांचा परखा और अपने नई उपकरणों की भी परख की है। विजयी भव: अभ्यास के बाद यह हाल के समय में ऐसा दूसरा बड़ा अभ्यास है। इसमें भारत की सेना अपने त्वरित कार्रवाई युद्ध की कड़ी जांच-परख कर रही है। यह भी विडम्बना ही है कि इस पूरे अभ्यास में भी कोई महिला हमलावर भूमिका में नहीं थी. जिसकी प्रत्यक्षदर्शी सुप्रीम कमांडर थीं। पिछले नवंबर में ही सैन्य बलों ने महिला अधिकारियों को स्थाई कमीशन देने के बारे में जो नीतिगत प्रारूप सरकार को सौंपा है उसमें भी महिलाओं को लडाकू भूमिका में उतारने का कोई उल्लेख नहीं है।

Related Posts: