भोपाल, 8 दिसंबर.नभासं. संत आसाराम गुरुकुल से बच्चों के भागने की खबर लगने के बाद जब मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग के सदस्य वहां अचानक निरीक्षण के लिए पहुंचे, तो बच्चों ने खुलासा किया कि आश्रम में उन्हें डराया-धमकाया जाता है, भरपेट खाना नहीं मिलता और उनके साथ मारपीट भी की जाती है.

आयोग के सदस्य डॉ. विभांशु जोशी एवं डॉ. आरएच लता के अनुसार बच्चों ने उन्हें बताया कि उन्हें सजा देने एवं मारपीट के लिए बाकायदा एक व्यक्ति की नियुक्ति की गई है. वह व्यक्ति कभी डंडे से, तो कभी घूंसों से बच्चों की पिटाई करता है. उन्होंने बताया कि दोनों सदस्यों ने आश्रम में तीन घंटे का समय बिताया और इस दौरान बच्चों ने उनसे कहा कि पिछले दस दिनों से उन्हें खाना नहीं दिया गया था. यदि कोई भी उन्हें खाना देता था तो उसे मार पडती है. बच्चों ने उन्हें शरीर पर पिटाई के निशान भी दिखाए. डॉ. जोशी ने कहा कि बच्चों के अनुसार आश्रम में नियुक्त सुरेश नामक व्यक्ति उनकी डंडे से पिटाई करता है. पूछताछ में सुरेश ने स्वीकार किया कि उसे बच्चों को धमकाने के लिए ही रखा गया है. उसे क्लास टीचर से उन बच्चों की लिस्ट मिलती है, जिनकी पिटाई करनी होती है. सदस्यों ने बताया कि बच्चों से बातचीत में पता चला कि उन्हें भरपेट खाना नहीं दिया जाता. यदि बच्चे खाने में कंकड निकलने की शिकायत करते हैं तो दो-दो दिन तक भोजन नहीं दिया जाता. आयोग ने बताया कि गुरुकुल प्रबंधन का कहना है कि जो बच्चे आश्रम से भागे हैं, वे शरारती थे. इसकी शिकायत उनके अभिभावकों से भी की गई थी, लेकिन वे उन्हें अपने साथ लेकर नहीं गए. ये बच्चे अन्य बच्चों के पैसे चुराकर भागे थे, जबकि बच्चों का कहना है कि भूख और पिटाई के कारण बच्चे आश्रम से भागे हैं. जब आयोग ने गुरुकुल के प्राचार्य चंद्रप्रकाश ग्रोवर से बात की तो उन्होंने कहा है कि वह सेवानिवृत्त संयुक्त संचालक है और उन्हें पता है कि बच्चों को कैसे संभालना है.

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