मैनपुरी, 20 फरवरी. सपा अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र मैनपुरी में ही समाजवादी पार्टी को बागी प्रत्याशियों से कड़ी चुनौती मिल रही है। सपा अध्यक्ष ने इटावा के बाद इसे अपना दूसरा घर बताते हुए यादव बहुल मैनपुरी की सभी विधानसभा सीटों पर पार्टी की जीत के लिए इज्जत का वास्ता दिया है। सभी चार विधानसभा सीटों पर कांटे की टक्कर मानी जा रही है। सपा के गढ़ को चुनौती इस विधानसभा में उनकी पार्टी की सदस्य रही, लेकिन अब बसपा प्रत्याशी संध्या कटारिया दे रही हैं।

दूसरी ओर भाजपा के सच्चिदानंद हरिसाक्षी महाराज भी सामने डटे हैं। मैनपुरी जिले की चार विधानसभा सीटों के लिए पांचवें चरण में 23 फरवरी को मतदान होना है। चुनाव प्रचार में राजनीतिक दलों ने पूरी शक्ति लगा दी है। चारों विधानसभा क्षेत्र में कुल 11,51,991 मतदाता हैं। इनमें युवा मतदाता पांच लाख हैं जिन्हें हाल ही में वोट डालने का अधिकार हासिल हुआ है। मैनपुरी जिले में पिछले चुनाव में पांच विधानसभा क्षेत्र थे। परिसीमन के बाद घिटोर विधानसभा सीट को समाप्त कर दिया गया। अब मैनपुरी, किशनी, भोगांव और करहल विधान सीट है। मैनपुरी सपा के गढ़ के रूप में जाना जाता है। करहल, किशनी और भोगांव सीट विधानसभा के पिछले चुनाव में सपा ने ही जीती थीं। इस बार सपा प्रत्याशी प्रत्येक सीट पर कड़े संघर्ष में हैं। इसका कारण समाजवादी पार्टी के बागी नेता ही हैं। मैनपुरी विधानसभा सीट से पिछले चुनाव में भाजपा के अशोक चौहान जीते थे।  इस बार भाजपा ने नरेन्द्र सिंह राठौर को प्रत्याशी बनाया है। सपा ने राजकुमार यादव उर्फ राजू यादव पर अपना दाव खेला है।

सपा के कई नेताओं को राजू यादव की उम्मीदवारी पसन्द नहीं आई और उन्होंनें विरोध करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने पार्टी छोड़ दी। अब सपा के बागी प्रो. केसी यादव कांग्रेस के प्रत्याशी हैं। सीधा सादा व्यक्तित्व भी उन्हें सपा, भाजपा और बसपा के साथ संघर्ष में ले आया है। करहल विधानसभा सीट से बसपा सरकार में मंत्री जयवीर सिंह चुनाव लड़ रहे हैं। सपा ने अपने वर्तमान विधायक सोबरन सिंह यादव को चुनाव मैदान में उतारा है लेकिन यहां भी मुलायम सिंह को अपनों का ही विरोध झेलना पड़ रहा है। सपा के बागी अनिल यादव जहां भाजपा प्रत्याशी हैं वहीं उर्मिला यादव कांग्रेस से चुनाव मैदान में हैं। सबसे खास बात यह है कि उर्मिला यादव मुलायम सिंह की रिश्ते में समधिन भी हैं और खत्म हुई घिरोर सीट से दो बार विधायक भी रह चुकी हैं। यहां भी सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस में चतुष्कोणीय संघर्ष है। किशनी सीट से सपा की बागी वर्तमान विधायक संध्या कठेरिया इस बार हाथी की सवारी कर पहली बार यहां बसपा का खाता खोलने को बेताब हैं। उनका मुख्य मुकाबला सपा के बृजेश कठेरिया से है। सपा-बसपा में कांटे की टक्कर है। भाजपा से सुनील जाटव व कांग्रेस से रामसिंह भी अपनी ताकत चुनाव जीतने में लगा रहे हैं।

राजनाथ और रीता  को जीत का भरोसा

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने कहा कि जिस तरह की सत्ता विरोधी लहर वर्ष 2007 में तत्कालीन सत्तारूढ़ दल समाजवादी पार्टी (एसपी) के खिलाफ चल रही थी, इस वक्त कमोबेश वही स्थिति बीएसपी के लिए है। उन्होंने कहा कि इस बार बढ़ा हुआ मत प्रतिशत लोगों का मायावती सरकार के प्रति गुस्से का इजहार है। उधर, उत्तर प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष तथा लखनऊ छावनी क्षेत्र से पार्टी प्रत्याशी रीता बहुगुणा जोशी ने राजधानी की सभी नौ सीटों पर कांग्रेस की जीत का विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि जैसे-जैसे चुनाव आगे बढ़ेंगे. कांग्रेस और मजबूत होती जाएगी।

किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा: कल्याण

अलीगढ़। सूबे के सियासी घमासान के चार चरण पूरे हो चुके हैं। अब बारी पश्चिमी और मध्य यूपी की है। यहां एक छोर पर पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सिक्का चलता है तो दूसरे पर मुलायम का। रालोद-कांग्रेस के गठजोड़ का नतीजा भी यहीं से तय होगा। कल्याण पर सबकी निगाहें हैं।  कल्याण  कहते हैं- यूपी में त्रिशंकु विधानसभा होगी। किसी को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलेगा। मैं खुद प्रदेश की 60 सभाएं कर चुका हूं। बहुत अच्छा रेस्पांस मिला है। जेकेपी के पक्ष में चमत्कारी परिणाम आएंगे। भाजपा  कहीं नहीं ठहरेगी। यूपी में भाजपा को सिर्फ 42 सीटें मिलेंगी।

अलीगढ़ से सूपड़ा साफ हो जाएगा। एक सीट न मिलेगी उन्हें।

भाजपा के बड़े नेताओं के बारे में क्या कहते हैं?
पूरी फौज लगी है, पर कई बड़े हारेंगे। लखनऊ की पांचों सीटें हारेगी भाजपा। बुंदेलखंड में 17 सीटें हैं, खाता नहीं खुलेगा। उमा भारती भी हारेंगी। सब जगह एक बार गया हूं, वहां मैंने दो सभाएं की हैं। भाजपा में जनाधार वाले नेता कहां हैं? गडकरी तो बिजनेसमैन हैं। आडवाणी, राजनाथ, जोशी, कलराज, सुषमा, विनय कटियार. सब घर में नहीं जीत सकते।
हार की वजह?
धोखाधड़ी, विश्वासघात.. और क्या? हिंदुत्व, राम-मंदिर, कश्मीर से धारा-370 को हटाने, समान नागरिक संहिता लागू करने.. इन्हीं मुद्दों से तो सत्ता पाए थे, सब छोड़ दिए। सरकार रहती या जाती, मैं प्रधानमंत्री होता तो मंदिर निर्माण का विधेयक जरूर लाता। पर.. ये जयश्री राम की बजाय जयश्री जिन्ना बोल रहे हैं। .कैसी शुचिता की बात करते हैं? विधानसभा में इनके मंत्री नंगी फिल्में देखते हैं। रिश्वतखोरी करते हैं।

सपा व कांग्रेस में तेज होगी मुस्लिम मतों की जंग

नई दिल्ली. उत्तार प्रदेश में मुस्लिम वोटों के लिए कांग्रेस और सपा में शुरू जंग मतदान के अगले तीन चरणों में और तेज होगी। अब तक चार चरणों के मतदान और उसमें मुस्लिम मतदाताओं के रुझान ने दोनों दलों को चौकन्ना कर दिया है। लिहाजा दोनों की नजरें अगले चरणों की लगभग पांच दर्जन उन सीटों पर टिक गई हैं, जिन पर हार-जीत का फैसला 30 प्रतिशत से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के हाथ में है। जबकि, इन्हीं चरणों में 20 से 29 प्रतिशत मुस्लिम मतदाताओं वाली ढाई दर्जन सीटों को भी हथियाने की लड़ाई है। मुस्लिम मतदाताओं के लिहाज से कांग्रेस और सपा दोनों ही छठे और सातवें चरण के मतदान को लेकर यादा सतर्क हैं। पांचवें चरण में फिरोजाबाद और एटा की पटियाली सीट के अलावा कानपुर की कल्यानपुर, सीसामऊ, आर्यनगर और कानपुर कैंट सीट पर भी दोनों के लिए इसी तरह की चुनौती है।

उत्साह बरकरार, रायबरेली में सर्वाधिक मतदान

लखनऊ। दौर चौथा। विधानसभा सीटें 56 और मतदान 57.2 फीसदी। और रायबरेली में सबसे ज्यादा मत। यानी उत्तार प्रदेश में एक बार फिर मतदान केंद्रों पर मतदाताओं का हुजूम उमड़ा। इनमें प्रियंका वाड्रा की मौजूदगी को लेकर सर्वाधिक चर्चा में रहने के साथ-साथ कांग्रेस प्रमुख सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी के लिए सर्वाधिक प्रतिष्ठापूर्ण अमेठी और रायबरेली की सीटें भी शामिल रहीं। चुनाव आयोग की चाक-चौबंद व्यवस्था की इससे बड़ी गवाही क्या होगी कि कहीं भी कोई अप्रिय वारदात नहीं हुई। उत्तर प्रदेश में रविवार को रायबरेली, लखनऊ, हरदोई, उन्नाव, फर्रुखाबाद, कन्नौज, बांदा, चित्रकूट, फतेहपुर, प्रतापगढ़ और छत्रपति शाहूजी महाराज नगर [अमेठी] के 1.74 करोड़ मतदाताओं ने ईवीएम के जरिए 967 प्रत्याशियों का भविष्य तय कर दिया।

प्रत्याशियों में तीन मंत्री, 32 विधायक, 12 पूर्व मंत्री, भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कलराज मिश्र और कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीता बहुगुणा जोशी भी शामिल हैं। रायबरेली में सबसे ज्यादा मत पड़े। दस्युओं का आतंक क्षेत्र रहे बांदा और चित्रकूट में भी मतदान का प्रतिशत बेहतर रहा। लखनऊ में मुख्यमंत्री मायावती और राज्यपाल बीएल जोशी ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी उमेश सिन्हा ने बताया कि रविवार को 11 जिलों की जिन 56 सीटों पर मतदान हुआ है, वहां वर्ष 2007 में 43.84 फीसदी ही वोट पड़े थे।

38 शिकायतें:

-मतदान के दौरान मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय में 38 शिकायतें प्राप्त हुईं। अधिकांश मतदाता सूची में नाम न होने, मतदान की धीमी प्रक्रिया से संबंधित थीं। इसके अलावा इलेक्ट्रानिक वोटिंग मशीन की गड़बड़ी की 30 शिकायतें आईं। पंद्रह वोटिंग मशीनों को बदलवाया गया। 270 मतदान केंद्रों पर वेबकैम लगाकर इसका सीधा प्रसारण किया गया। मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने बताया कि कहीं भी चुनाव के बहिष्कार का मामला सामने नहीं आया है। फर्रुखाबाद में एक जगह हवाई फायर की बात सामने आई, लेकिन यह दो गुटों के विवाद से जुड़ी थी। मतदान पर इसका असर नहीं रहा।

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