भोपाल, 21 मई नभासं. इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय मानव संग्रहालय में जनजातीय आवास स्थित चर्चाघर में आयोजित ग्रीष्मकालीन शैक्षणिक कार्यक्रम करो और सीखो के अंतर्गत लगभग 40 प्रतिभागी पष्चिम बंगाल की प्रसिद्ध जूट ज्वेलरी एवं शोला षिल्प कला का प्रषिक्षण ले रहे है.

जूट ज्वेलरी के परंपरागत कलाकार स्वरूप मंडल जूट से विभिन्न प्रकार के कलात्मक आभूषण जिसमें पहनने वाले हार, मालाएं एवं अन्य सजावटी आइटम बनाने का प्रषिक्षण दे रहे है.
साथ ही शोला षिल्प की कलाकार कृष्णा भास्कर ने शोला लकड़ी पर विभिन्न आकार के फूल, पत्ती, नाव, हाथी आदि बनाना सिखा रही है. शोला षिल्प का इतिहास लगभग 300 साल पुराना है यह भारत की पूर्वोत्तर क्षेत्र में रहने वाली विभिन्न जनजातीयों की परंपरागत कला है. इस षिल्प से बनी वस्तुओं का उपयोग जन्म एवं विवाह समारोह के समय किया जाता है. शोला एक प्रकार की विषेष लकड़ी है जो बहुत ही नरम होती है. यह ऊपर से व्राउन होती है. छीलने पर यह अंदर सफेद निकलती है और कागज की तरह परत निकलती है. जिन पर आसानी से उक्त चीजे बनायी जाती है बाद में इन पर रंग रोगन कर के सुंदर एवं आकर्षक बनाया जाता है.

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