मध्यप्रदेश भारतीय जनता पार्टी ने वर्ष 2013 में होने जा रहे विधानसभा चुनावों के लिये अभी से अभियानों का सिलसिला शुरु कर दिया है. जैसे इस समय केन्द्र में यू.पी.ए. की द्वितीय सरकार चल रही है, उसी तरह मध्यप्रदेश में भी भाजपा की द्वितीय राज्य सरकार चल रही है. कांग्रेस केन्द्र में और भाजपा मध्यप्रदेश में अपनी सरकार की हैट्रिक तीसरी बार बनाना चाहते हैं.

अन्ना हजारे व लोकपाल के मसले पर जो माहौल भ्रष्टïचार के विरुद्ध बना हुआ है, उसी के अनुरूप राज्य पार्टी के अध्यक्ष श्री प्रभात झा ने यह घोषणा की है कि वे पून्जीपतियों से चुनाव के लिये पार्टी फंड नहीं लेंगे बल्कि यहां जन-सम्पर्क अभियान चलाया जायेगा जो पार्टी फंड के लिये 5 रुपये से लेकर 1000 रुपये तक प्रति व्यक्ति आर्थिक सहयोग लेंगे. पार्टी 15 लाख नये सदस्य बनायेगी. इसमें युवा, महिला व अल्पसंख्यक मोर्चों का कोटा निर्धारित किया गया है. श्री झा ने पार्टी के लोगों को मकान, दुकान व खदान पाने की दौड़ से दूर रहने को कहा. पार्टी ने अगला चुनाव तीन/चौथाई से जीतने का लक्ष्य निर्धारित किया है. इसके लिये पार्टी अगले दो सालों तक पंचायत से राजधानी तक सघन सुशासन अभियान चलायेगी.

मध्यप्रदेश देश का वह राजनैतिक रूप से परिपक्व राज्य है जहां ‘दो पार्टी प्रणाली’ स्थापित हो चुकी है. यहां सत्ता का संघर्ष कांग्रेस व भारतीय जनता पार्टी के बीच ही सत्ता का परिवर्तन होता रहता है. यहां संविद व जनता पार्टी शासन काल में अल्प अवधि के साझा सरकार के दो दौर आये थे. अब ऐसी कोई संभावना यहां नहीं है कि कभी कोई तीसरा दल उभरेगा. भाजपा ने कांग्रेस के श्री दिग्विजय सिंह की दो कार्यकाल वाली 10 वर्षीय सरकार को भारी पराजय देकर अपनी सत्ता कायम की है. अब कांग्रेेस भी इस तैयारी में जुटी है कि वह भी भाजपा की 10 साल की सरकार को हराकर अपनी पिछली हार का हिसाब बराबर कर सके. वर्तमान कांग्रेस के श्री अजय सिंह विपक्ष के नेता हैं. उनकी यह कामना भी होगी कि वे अपने पिता भूतपूर्व मुख्यमंत्री श्री अर्जुन सिंह की तरह मुख्यमंत्री बने.

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