बेंगलुरु, 9 फरवरी. कर्नाटक में सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के लिए कुछ भी अच्छा नहीं चल रहा है. अब सरकार के दबाव में राज्य के महाधिवक्ता बी. वी. आचार्या को अपना पद छोडऩा पड़ा है.

आचार्या एक वरिष्ठ वकील हैं. उन्हें सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर कर्नाटक के चीफ जस्टिस ने तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जे. जयललिता के खिलाफ भ्रष्टाचार के एक मामले में विशेष लोक अभियोजक (एसपीपी) भी नियुक्त किया था. 78 साल के आचार्या ने यहां बुधवार रात कहा कि सरकार की ओर से उन पर एसपीपी पद छोडऩे के लिए दबाव बनाया गया था. उनसे यह पद छोडऩे के लिए दबाव बनाते हुए कहा गया कि एक समय में दो पदों पर नहीं रहा जा सकता. इससे पहले बुधवार को भाजपा के तीन मंत्री अपने पदों से इस्तीफे दे चुके हैं. इनमें से दो को विधानसभा में अश्लील वीडियो देखते पकड़ा गया था. आचार्या ने कहा कि उनके कर्नाटक के महाधिवक्ता व जयललिता मामले में एसपीपी के रूप में एकसाथ काम करने में कोई कानूनी रुकावट नहीं थी.

वैसे उन्होंने कहा कि उन्होंने एसपीपी बने रहने को प्राथमिकता दी क्योंकि कर्नाटक के चीफ जस्टिस ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उनकी नियुक्ति की थी. राज्यपाल एच. आर. भारद्वाज ने बुधवार रात उनका इस्तीफा मंजूर कर लिया. भाजपा व सरकार ने आचार्या के दावों पर प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया. जयललिता के खिलाफ मामला है कि उन्होंने मुख्यमंत्री के तौर पर अपने पहले कार्यकाल में 60 करोड़ रुपए की, आय से अधिक सम्पत्ति अर्जित की. सुप्रीम कोर्ट ने निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए मामले को बेंगलुरू हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया है. आचार्या ने कहा कि उनके महाधिवक्ता का पद छोडऩे के निर्णय का बेंगलुरू के एक शैक्षिक ट्रस्ट में वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों से कोई लेना-देना नहीं है. आचार्या इस ट्रस्ट से जुड़े हुए हैं. हाल ही में हाई कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई थी. जिसमें आचार्या के एक ही समय में दो पदों पर रहने पर सवाल उठाया गया था.

राष्ट्रपति शासन की मांग
कर्नाटक में विपक्षी कांग्रेस और जनता दल (एस) विधायकों ने गुरुवार को राज्यपाल एच. आर. भारद्वाज से मुलाकात की और उनसे केन्द्र से प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की सिफारिश करने का आग्रह किया.  वरिष्ठ कांग्रेस नेता सिद्दरामैया ने कहा हमने राज्यपाल से मुलाकात की और संवैधानिक कानूनों के अनुरूप शासन में नाकामी पर केन्द्र सरकार से धारा 356 के तहत विधानसभा भंग करने की सिफारिश करने का उनसे आग्रह किया.

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