कांग्रेस ने की लोकायुक्त में शिकायत

भोपाल, 6 मई. भारत सरकार ने राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान के तहत स्कूलों में मायनर रिपेयङ्क्षरग के लिये 11,57,50000 रु. स्कूल शिक्षा विभाग म.प्र. को दिये. इस राशि का उपयोग शाला भवन की मरम्मत, रखरखाव, पुताई, शौचालय, पानी का टैंक, खेल मैदान, विद्युत फिङ्क्षटग, सेनेटरी एवं फर्नीचर पर खर्च किया जाना था. इस राशि का खर्च करने का अधिकार शाला प्रबंध एवं विकास समिति की निगरानी में आवश्यकता एवं औचित्य के आधार पर व्यय की जाना थी.

इस समिति में विद्यालय के प्राचार्य से लेकर पालक एवं जन प्रतिनिधि सहित कुल 15 सदस्य शामिल हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री ने अपने पद का दुरुपयोग करते हुये एक आदेश जारी किया जिसमें चिटनिस ने कक्षाओं मे लगे ब्लेक बोर्ड की रिपेयङ्क्षरग करने और उसे हरा रंग देने के निर्देश दिय थे. श्रीमती चिटनिस ने नोटशीट में लिखा था कि यह कार्य संभागीय संयुक्त संचालक, लोक शिक्षण की मोनिटिरिंग में होगा. इस नोटशीट के आधार पर ही आयुक्त लोक शिक्षण ने सभी संभागीय संयुक्त संचालकों को एक परिपत्र जारी किया जिसमें उल्लेख किया कि अभियान चलाकर ब्लेक बोर्ड की रिपेयङ्क्षरग और उसे हरा रंग देने का कार्य सम्पादित किया जाये. यह दोनों ही आदेश भारत सरकार की गाइड लाइन के विपरीत हैं. स्कूल शिक्षा मंत्री ने यह आदेश इसलिये जारी किये कि उन्हें उज्जैन की फर्म क्लासिक ट्रेडर्स और बड़वानी की आदिनाथ इंटरप्राइजेस को उपकृत किया जा सके एवं स्वयं भी लाभ अर्जित कर सके. अपनी इसी मंशा की पूर्ति के लिये प्रदेश के 25 जिलों में एक अभियान चलाकर रिपेयर के नाम पर एक ही समय में क्लासिक ट्रेडर्स उज्जैन से ब्लेक बोर्ड को ग्रीन कराया गया.

ब्लेक को ग्रीन कराने के खेल में स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस ने 11,57,50,000 रु. का गोलमाल किया. यही नहीं मंत्री ने चहेती फर्म को टीकमगढ़ जिले के कई स्कूलों में ब्लेक बोर्ड को हरा रंग पोते बिना ही भुगतान कर दिया गया. कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. गोङ्क्षवद ङ्क्षसह ने बताया कि लोकायुक्त संगठन पहुंचकर स्कूल शिक्षा मंत्री अर्चना चिटनिस के खिलाफ 5 मई को शिकायत दर्ज कराना पड़ा. यदि लोकायुक्त संगठन ने भी इस भ्रष्टïचार के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया तब न्यायालय की शरण लेना पड़ेगी.

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