पर्यावरण क्षति के बाद भी फल-फूल रहा अवैध कारोबार

विदिशा, 16 दिसम्बर न.स.से. शहर एवं ग्रामीण क्षेत्रों में ईंट भट्टों का अवैध कारोबार प्रशासन की मिली भगत से तेजी से फल-फूल रहा है, जिसने पर्यावरण को क्षति पहुंचाने के साथ ही बेतवा नदी तथा पारासरी नदी का स्वरूप ही बिगाड़ दिया है.

ईंट भट्टों के काण नदियों के किनारे यह पता ही नहीं लगता कि नदी के किनारे कहां हैं? इसी प्रकार ग्रामीण क्षेत्रों में लगे ईंट भट्टों ने वहां के नदी-नालों की हालत बदतर कर दी है. गांव के लोग ईंट भट्टा लगाने वालों को किराए पर जमीन देते हैं और  संसाधन उपलब्ध कराने मोटी रकम वसूलते हैं परंतु यह नहीं सोचते कि इससे गर्मी के मौसम में पेयजल संकट बढ़ेगा और फसलों को क्षति हो सकती है. ईंट निर्माण के लिए तहसील में बड़े पैमाने पर अवैध रूप से मिट्टी का उत्खनन किया जा रहा है, जिससे नदी के पाट चौड़े हो गए हैं और आसपास प्रदूषण बढ़ रहा है. गंजबासौदा तहसील से भोपाल, विदिशा व अन्य नगरों में ईंटे भेजी जा रहीं हैं. इसलिए नगर के आसपास यह कारोबार बड़े स्तर पर चल रहा है. संबंधित विभागों के अधिकारियों की लापरवाही या मिली भगत के चलते ईंटों का अवैध कारोबार बढ़ता ही जा रहा है. ईंट भट्टों के प्रदूषण से पर्यावरण को क्षति से कभी कभार जांच पड़ताल में पकड़ी-धकड़ी हुई भी है तो ऐसी परिस्थिति में ईंट-भट्टों कारोबारियों तथा रेत वालों ने प्रशासन को सहयोग किया है, जिसकी मिसाल लाल परेड़ ग्राउंड है, जहां करोड़ों का निर्माण जन भागीदारी से ही हुआ है. इसमें कोई शक नहीं है कि जन भागीदारी में सहयोग करने अवैध कारोबारी कभी पीछे नहीं रहते. शासन की जन कल्याणकारी नीतियों को सफल बनाने में अवैध कारोबारी रहते हैं. यही कारण रहता है कि वरिष्ठ अधिकारी इनसे पंगा नहीं लेते. वे जानते हैं कि इनसे विरोध लेना बिल्ली के गले में घंटी बांधने जैसा है. उनकी स्थिति बहरूपियों जैसी है कि वे जाने किस रूप में क्या गुल खिला दें. इसी कारण करोड़ों के घोटालों के बाद भी पत्थर खदानों, जंगल, रेत और ईंट -भट्टा माफियाओं के विरूद्ध कभी कोई बड़़ी कार्यवाही नहीं की गई.

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