मैरीकोम सेमीफाइनल में, रहाली को एकतरफा मुकाबले में हराया

लंदन, 6 अगस्त. पांच बार की विश्व चैंपियन भारत की एमसी मैरीकोम ने लंदन ओलंपिक की महिला मुक्केबाजी प्रतियोगिता में ट्यूनीशिया की रहाली मारोवा को एकतरफा मुकाबले में 15-6 से रौंदकर 51 किग्रा फ्लाईवेट वर्ग के सेमीफाइनल में पहुंचने के साथ ही पदक पक्का कर लिया.

मैरीकोम लंदन ओलंपिक के सेमीफाइनल में पहुंचने वाली पहली भारतीय मुक्केबाज हैं और इसी के साथ ही उन्होंने भारत के लिए चौथा पदक पक्का कर लिया. ओलंपिक में एकमात्र महिला भारतीय मुक्केबाज मैरीकोम ने शानदार शुरूआत करते हुए पहला राउंड 2-1 से जीता और फिर दूसरे राउंड को 3-2 से जीतकर अपनी बढ़त को 5-3 पहुंचा दिया. भारतीय मुक्केबाज ने तीसरे राउंड में रहाली पर ताबड़तोड़ पंच जड़ते हुए यह राउंड 6-1 से जीतकर अपनी बढ़त 11-4 पहुंचा दी. चौथे एवं अंतिम राउंड में मैरीकोम को अपनी बढ़त बरकरार रखने की जरूरत थी लेकिन मैरीकोम ने अपना आक्रामक प्रदर्शन जारी रखते हुए इस राउंड में 4-2 का स्कोर किया और 15-6 से जीत दर्ज करते हुए सेमीफाइनल में जगह बना ली. महिला मुक्केबाजी को लंदन ओलंपिक में पहली बार शामिल किया गया है. मैरीकोम ने प्री-क्वार्टरफाइनल में पोलैंड की कैरोलीना मिचलजुक को 19-14 से हराकर क्वार्टरफाइनल में जगह बनायी थी जबकि रहाली को बाई मिली थी.

जुडवां बेटों की मां मैरीकोम ने 2002, 2005, 2006, 2008 और 2010 की विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीते थे. हालांकि उन्होंने ये सभी स्वर्ण पदक 46 और 48 किग्रा में जीते थे. लेकिन ओलंपिक में यह वजन वर्ग न होने के कारण उन्हें 51 किग्रा फ्लाईवेट वजन वर्ग में खुद को शिफ्ट करना पडा. मैग्नीफिशंट मैरी के नाम से मशहूर मैरीकोम ने 2006 के बाद दो साल का ब्रेक ले लिया था लेकिन उन्होंने अपने संन्यास से जोरदार वापसी करते हुए 2008 में एशियाई चैंपियनशिप में रजत पदक और विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक हासिल किया था. अपने गृह राज्य के डिंको सिंह से प्रेरणा लेकर मुक्केबाज बनी मैरीकोम ने 2010 के ग्वांगझू एशियाई खेलों में कांस्य पदक भी जीता था.

देश के सर्वोच्च खेल पुरस्कार खेल रत्न से सम्मानित मैरीकोम ने बार-बार कहा था कि यदि महिला मुक्केबाजी को ओलंपिक में शामिल किया जाता है तो वह देश को पदक दिलाकर रहेंगी. आखिर उन्होंने अपनी बात को सही साबित कर दिखाया. मैरीकोम जब अपना क्वार्टरफाइनल मुकाबला जीत रही थीं तो उनकी इस उपलब्धि को देखने के लिए उनकी मां भी दर्शकों के बीच मौजूद थीं. हालांकि मैरी के अमेरिकी कोच चार्ल्स एटकिंसन उनके साथ खेलगांव में नहीं पहुंच पाए क्योंकि उनके पास आइबा का थ्री स्टार प्रमाण पत्र नहीं था. लेकिन मैरी ने अपने कोच की उम्मीदों को टूटने नहीं दिया और उन्होंने अपने मुक्कों के प्रहार से रहाली को धूल चटा दी. मैरीकोम के सामने अब सेमीफाइनल में दूसरी वरीयता प्राप्त मेजबान ब्रिटेन की निकोला एडम्स की चुनौती रहेगी जिन्होंने बुल्गारिया की स्तोइका पेत्रोवा को 16-7 के बडे अंतर से पराजित किया.

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