मण्डला 15 दिसम्बर. मण्डला में बांस के  उद्योग  विकास की महती संभावना है. जिला घने वन परिक्षेत्र में संपूर्ण विश्व में अपनी अलग पहचान रखता है. साथ ही बांस जिले की अर्थव्यस्था से जुड़ा होने के साथ-साथ घने जंगलों से भी घिरा हुआ है.

ग्रामीण पीढिय़ों से बांस आधारित कुटीर उद्योगों को अपनाये हुए है. आवश्यकता है ग्रामीण कारीगरों को उनका अधिकार मिले, उनके श्रम, पसीने की हर बूंद का उचित दाम मिले. इसके लिए बांस उद्योग के दायरे को बढ़ाने की आवश्यकता है. जिससे एक सीमित दायरे  में सिमटा कुटीर उद्योग वृहत उद्योग का रूप ले सके. इससे न केवल उन कारीगरों को लाभ होगा जो बांस की कारीगरी से जुड़े है अपितु जिले की अर्थव्यवस्था भी बढ़ेगी. कारीगरों द्वारा बनाये आकर्षक बांस के फर्नीचर आज प्रसिद्घ हो रहे है लेकिन इस प्रसिद्घि का कितना लाभ उन कारीगरों को मिल रहा है जो सदियों से इस कला को सहेजे हुए है.

कुछ  नहीं हुआ अभी तक…….
कुटीर उद्योग को बढ़ाने के लिए पिछले कुछ वर्षो में शासन के प्रयासों से  इतना परिवर्तन हुआ है कि गांव की कला-संस्कृति शहर के कुछ एक कलादीर्घो की शोभा बढ़ाने लगी है. कारीगरों की नियमित आय की यदि बात की जाये तो आज भी इस उद्योग से उनका जीवनयापन कठिनाईयों भरा, इसका प्रत्यक्ष प्रमाण यह है कि इन कारीगरों को अपनी अजीविका चलाने के लिए बंधी मजदूरी भी करनी पड़ती है. कलादीर्घा केन्द्र मण्डला के प्रबंधक  ने  चर्चा के दौरान बताया कि जिले के विशेषकर बसोर जाति के लोग बांस की कारीगरी से जुड़े है. इसके  अलावा बरमैया लोग भी बांस के कुशल कारीगर है. पंचायत राज की कुछ एक योजनाओं के तहत कुटीर उद्योग के विकास की नींव रखी गई है. जिसमें कारीगरों को आधुनिक सोच के साथ बांस की कलाकारी के लिए प्रशिक्षित किया गया है. पारम्परिक रूप से वे पहले टोकनी सूपा आदि घरेलू वस्तुएं बनाते थे. अब वहीं हाथ आकर्षक बांस के फर्नीचर बना रहे है. ऐसे फर्नीचर की मांग अत्याधिक है. जिला पंचायत के द्वारा संचालित कलादीर्घा केन्द्र मण्डला से नैनपुर, बीजाडांडी, मोचा, कान्हा आदि क्षेत्रों के कारीगरों द्वारा निर्मित वस्तुओं को प्रदर्शित कर बेचने की व्यवस्था है. यहां से जबलपुर, भोपाल जैसे शहरों से पर्यटक बांस की बनी वस्तुओं को खास तवज्जो देकर खरीदते है.

आश्वासन मिला है …..
मैने आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति कल्याण मंत्री कुंवर विजय शाह से इस संबंध में चर्चा  की थी.मुझे आश्वासन दिया था, किन्तु  अभी तक कोई योजना प्रारंभ नहीं की गई. मैने विधान सभा में भी उद्योग के संबंध में प्रश्न उठाया था. केन्द्र की योजना मे कुटीर उद्योग को लेकर अनेको योजनाएं की प्रदेश शासन को मंजूरी प्राप्त हुई है. किन्तु उद्योग को लेकर  मण्डला आज भी अछूता है.
नारायण पट्टा (बिछिया विधायक मण्डला)

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