लोकपाल पर मैराथन बैठकें

नई दिल्ली 19 दिसंबर. संसद का शीतकालीन सत्र अंतिम चरण में है और लोकपाल बिल लाने के लिए मैराथन बैठकों का दौर जारी है। रविवार को कैबिनेट की बैठक के बाद सोमवार को भी दिन भर मेल-मुलाकातें चलती रहीं। बिल के मसौदे को आखिरी शक्ल देने के लिए केंद्र सरकार के चार दिग्गज मंत्रियों के बीच ढाई घंटे बैठक चली।

गृहमंत्री पी चिदंबरम के दफ्तर में कानून मंत्री सलमान खुर्शीद, टेलीकॉम मंत्री कपिल सिब्बल और पीएमओ के राज्यमंत्री नारायण सामी जुटे। बैठक में बहस का असल मुद्दा सीबीआई थी, जिसे लोकपाल के दायरे में लाने की मांग पर टीम अन्ना अड़ी है। सीबीआई को लाया जाए या नहीं? अगर लोकपाल के दायरे में सीबीआई आ गई तो उसकी स्वायत्तता का क्या होगा? जाहिर है नेताओं को उसमें जोखिम नजर आ रहा है। यही वजह है कि लोकपाल बिल पास कराने के लिए बुलाई गई कैबिनेट की बैठक भी एक दिन के लिए टाल दी गई। सच कहें तो अन्ना के अनशन से टेंशन में आई सरकार अब और रिस्क लेने के मूड में नहीं है। उसकी कोशिश है कि जैसे भी हो बिल इसी सत्र में पास हो जाए। चाहे इसके लिए संसद का सत्र थोड़ा आगे ही क्यों न बढ़ाना पड़े। इससे पहले वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बीजेपी नेताओं के साथ इसी मसले पर बैठक की। इस बैठक में लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज, यशवंत सिन्हा और अरुण जेटली मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक इस बैठक में पहली बार संसद का सत्र बढ़ाए जाने की बात उठी। कहा जा रहा है कि प्रणब ने संकेत दिए कि सरकार संसद का सत्र कम से कम तीन दिन 27, 28 और 29 दिसंबर तक बढ़ाने पर विचार कर सकती है। इस मामले में कैबिनेट में चर्चा भी होगी। सरकार की इस कोशिश पर अन्ना के खेमे से भी तत्काल प्रतिक्रिया आई। चेन्नई से पुणे पहुंचे अन्ना ने कहा कि अगर सरकार मजबूत बिल लाती है तो मैं अनशन करने के बजाय दिल्ली के रामलीला मैदान से प्रधानमंत्री के लिए गुलाब का फूल भिजवाऊंगा।

जाहिर है टीम अन्ना भी जंग जीतने के लिए दो कदम आगे बढ़ाने के लिए एक कदम पीछे हटने को भी तैयार है। बिल का मसौदा अब प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी के पाले में है। दोनों की आखिरी रजामंदी के बाद ही बिल कैबिनेट में रखा जाएगा। लेकिन सीबीआई पर फंसा पेच मामूली नहीं है। खुद सीबीआई के डायरेक्टर ने इस मामले में गृहमंत्री पी चिदंबरम से मुलाकात की। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई डायरेक्टर ने लोकपाल के दायरे में आने से जुड़ी बातें और आशंकाएं जताईं। सरकार इस पहलू पर भी विचार कर रही है कि एक अलग डायरेक्टर के नेतृत्व में सीबीआई का एक धड़ा लोकपाल के लिए काम करे। बहरहाल सरकार के भीतर मशक्कत जारी है और चर्चाएं हैं कि अगर बिल 19 दिसंबर को नहीं पेश हुआ तो उसे झाड़ पोंछ कर 22 तारीख तक ले ही आया जाएगा ताकि दोबारा देश में अन्ना का ज्वार न उठ सके।

Related Posts: