संसद की 60वीं वर्षगांठ पर विशेष सत्र में मनमोहन सिंह ने कहा

नई दिल्ली, 13 मई. नससे. संसद की 60वीं सालगिरह के मौके पर रविवार को जब लोकसभा की विशेष बैठक शुरू हुई तो नजारा बिलकुल ही अलग था. न तो प्रश्नकाल स्थगन को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तनाव था और न ही शोरशराबा. संसद की गरिमा को लेकर उत्साहित सदस्य भाषणों के बीच पार्टी लाइन से अलग हटकर मेजें थपथपाते दिखे. न सदन की कार्यवाही में कोई व्यवधान हुआ और न ही कोई छींटाकशी. लेकिन कुछ सदस्यों ने यह जरूर कहा कि सदन में व्यवधान डालने से संसद की ही छवि पर आंच आती है, इसलिए सभी मसलों का हल बातचीत से निकाला जाना चाहिए.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने राज्यसभा में चर्चा की शुरूआत की.  विशेष बैठक में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि लगातार लोकतंत्र के पथ पर अग्रसर रहने के कारण ही विश्व में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है. प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में कहा, विश्व में हमारी प्रतिष्ठा बढऩे का एक कारण सामाजिक एवं आर्थिक समस्याओं को सुलझाने लिए लोकतंत्र के पथ पर अग्रसर होने की हमारी दृढ़ प्रतिबद्धता है. 60 महिलाएं -विशेष सत्र में चर्चा की शुरुआत लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार ने की. उन्होंने संसद की गरिमा का जिक्र करते हुए इसे बनाए रखने की अपील की. उन्होंने संतुलन बनाए रखने की जरूरत पर जोर दिया. उन्होंने  कहा कि जब पहली लोकसभा का गठन हुआ तो उसमें 21 महिला सदस्य थीं, जबकि इस सदन में 60 सदस्य हैं. उन्होंने संविधान की विशेषताओं का भी जिक्र किया.

मजबूत लोकतंत्र बनाए रखना चुनौती
राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने कहा कि मजबूत लोकतंत्र बनाए रखना चुनौती है. भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है. उन्होंने कहा कि भारत विश्व शांति के लिए संकल्पबद्ध है. स्थानीय निकायों के चुनाव निष्पक्ष तरीके से हों. पिछले दशक में मीडिया का प्रभाव बढ़ा है. प्रतिभा पाटिल रविवार को संसद के साठ साल होने पर संयुक्त सत्र को संबोधित कर रही थीं. उन्होंने अपने अभिभाषण में कहा कि चुनाव किसी भी लोकतंत्र की नींव हैं. सभी का सम्मान होने पर लोकतंत्र मजबूत होगा. उन्होंने कहा कि महिलाओं की सहभागिता बढ़ाई जानी चाहिए. चुनाव प्रक्रिया में सुधार हुए हैं. वक्त से साथ व्यवस्था भी मजबूत हुई है.

आचरण की दुहाई
सोनिया गांधी ने कहा कि संसद सदस्यों को अपना आचरण सबसे ऊपर रखना चाहिए. यह सदन सिर्फ ताकत का प्रतीक नहीं होना चाहिए बल्कि यहां से जनता को न्याय और अनुकंपा भी मिलनी चाहिए.

बाधा नहीं, चर्चा – सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि सदन में चर्चा के जरिए समस्याओं को सुलझाया जा सकता है. सभी को शपथ लेनी चाहिए कि वे सदन की बैठकों में बाधा नहीं डालेंगे.

विरोधी विचारधारा का सम्मान
लालकृष्ण आडवाणी ने कहा कि इस लोकतंत्र की सबसे बड़ी खूबसूरती है विरोधी विचारधारा का भी सम्मान करना.इसीसे लोकतंत्र मजबूत हुआ है.  अरूण जेटली ने पहली लोकसभा के सांसद रिशांग किशिंग को बधाई दी.

महिलाओं को नहीं मिला हक: सुषमा
सुषमा ने कहा कि बगैर सांसदों के संसद की परिकल्पना नहीं की जा सकती है. लेकिन अफसोस की बात ये है कि पिछले 60 सालों में महिलाओं की भागीदारी संसद में नहीं बढ़ी है.
गरीब तक लोकतंत्र – शरद यादव ने कहा कि सदस्यों ने उजला पक्ष दिखाया है, लेकिन एक अंधेरा पक्ष भी है, जिसे याद रखना चाहिए. लोकतंत्र संसद तक तो आ गया, लेकिन वह गरीब तक नहीं पहुंचा है.

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