स्पेक्ट्रम मामले को लेकर सोनिया के यहां बढ़ी गहमागहमी

पीएम के आने के बाद ही बोलूंगा : प्रणब

नई दिल्ली, 26 सितम्बर. 2जी घोटाला सरकार के लिए हर दिन एक नई मुसीबत खड़ा कर रहा है. आज शाम कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से उनके निवास पर मुलाकात करने के बाद गृह मंत्री पी. चिदंबरम ने अपने इस्तीफे की पेशकश की है.

सूत्रों से मिल रही जानकारी के अनुसार चिदंबरम ने सोनिया से कहा कि मेरा इस्तीफा पार्टी और देश हित में है. उधर, केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी अमेरिका से देश लौट आए हैं। उन्होंने कहा वह प्रधानमंत्री के लौटने से पहले मुंह नहीं खोलेंगे। मुखर्जी के लौटते ही साफ कर दिया कि वह इस पर बोलेंगे। उन्होंने कहा प्रधानमंत्री के आने से पहले मैं कुछ नहीं बोलूंगा। संकेत हैं कि प्रधानमंत्री के लौटने के बाद इस मसले पर सरकार के स्टैंड पर आखिरी फैसला होगा। संभावना यही लगती है कि सरकार वित्त मंत्रालय के नोट को खारिज कर देगी और चिदंबरम के साथ खड़ी दिखेगी। ऐसे में वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी की भूमिका क्या रहेगी इस पर सबकी निगाहें हैं।

इससे पहले के घटनाक्रम में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर कांग्रेस और सरकार के संकट को सुलझाने में जुटे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कोशिशें तुरंत परवान चढ़ती नहीं दिख रही हैं। गौरतलब है कि 2जी घोटाले पर प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजे गए वित्त मंत्रायल के नोट पर उपजे विवाद के मद्देनजर मुखर्जी का देश में बेसब्री से इंतजार किया जा रहा था। अमेरिका में मुखर्जी ने इस बारे में कुछ भी कहने से इनकार कर दिया था। उनकी दलील थी कि एक घरेलू मसले पर वह विदेशी जमीन से क्यों बोलें.

 

विदेशी जमीं पर मनमोहन सिंह से बहुप्रतीक्षित मुलाकात के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के तेवरों से पर्याप्त संकेत मिल गए कि विवाद के हाल-फिलहाल थमने के आसार नहीं है। बैठक के बाद प्रणब ने कहा कि वह वित्त मंत्रालय के उस नोट पर विशेषज्ञों की राय लेंगे, जिसमें पी. चिदंबरम के बारे में टिप्पणी की गई है। गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय ने एक नोट लिखकर कहा था कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला रोका जा सकता था बशर्ते तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम ने नीलामी प्रक्रिया पर जोर दिया होता।

मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने की ढाल बनाकर वित्त मंत्री ने इशारा कर दिया कि मंगलवार को 2जी मामले पर सुप्रीम कोर्ट का रुख देखने के बाद ही इस मसले की दशा-दिशा तय होगी। प्रणब ने चिदंबरम को अपना महत्वपूर्ण सहकर्मी बताया लेकिन यह भी स्पष्ट कर दिया कि गृह मंत्री, विधि मंत्री सलमान खुर्शीद और पार्टी के अन्य नेताओं के साथ चर्चा करने के बाद ही वह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करेंगे।


राजा पर सीबीआई का नया दांव

सीबीआई ने 2जी स्पेक्ट्रम घोटाले में स्पेशल कोर्ट से पूर्व टेलिकॉम मंत्री ए. राजा और अन्य दो के खिलाफ नए आरोप लगाने की अनुमति देने का का आग्रह किया है। अगर यह अनुमति मिल गई तो राजा पर सीबीआई का शिकंज कस जाएगा। स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर यू. यू. ललित ने अदालत में अर्जी दी है कि राजा, पूर्व दूरसंचार सचिव सिद्धार्थ बेहुरा और राजा के पूर्व निजी सचिव आर.के. चंदोलिया पर धारा-409 के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। यह धारा गैर-जमानती है। अगर यह धारा लगाई गई और आरोपी दोषी करार दिए गए तो उम्रकैद की सजा हो सकती है। अभी तक इनके खिलाफ प्रिवेंशन ऑफ करप्शन ऐक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था, जिसमें अधिकतम सजा सात साल की हो सकती है।


सुनवाई 12 अक्टूबर तक टली

2-जी मामले में पी चिदंबरम को आरोपी बनाने की याचिका पर सुनवाई टल गई है। 2-जी घोटाले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत को ये फैसला लेना है कि वो जनता पार्टी के नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका को मंजूर करे या नहीं। मामले की अगली सुनवाई अब 12 अक्टूबर को होगी। इससे पहले गुरुवार की सुनवाई के दौरान स्वामी ने कहा कि उनके पास कुछ नए सबूत हैं जिनसे पता चलता है कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा और पूर्व मंत्री पी चिदंबरम ने मिलकर 2-जी स्पेक्ट्रम की कीमतों और एंट्री फीस पर फैसला लिया था।

स्वामी ने कहा कि इस बारे में उनकी सीबीआई से भी बातचीत हुई है जिससे कुछ नए तथ्य सामने आए हैं।इससे पहले के घटनाक्रम में 2 जी स्पेक्ट्रम घोटाले पर कांग्रेस और सरकार के संकट को सुलझाने में जुटे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की कोशिशें तुरंत परवान चढ़ती नहीं दिख रही हैं। विदेशी जमीं पर मनमोहन सिंह से बहुप्रतीक्षित मुलाकात के बाद वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी के तेवरों से पर्याप्त संकेत मिल गए कि विवाद के हाल-फिलहाल थमने के आसार नहीं है।

बैठक के बाद प्रणब ने कहा कि वह वित्त मंत्रालय के उस नोट पर विशेषज्ञों की राय लेंगे, जिसमें पी. चिदंबरम के बारे में टिप्पणी की गई है। गौरतलब है कि वित्त मंत्रालय ने एक नोट लिखकर कहा था कि 2 जी स्पेक्ट्रम आवंटन घोटाला रोका जा सकता था बशर्ते तत्कालीन वित्त मंत्री चिदंबरम ने नीलामी प्रक्रिया पर जोर दिया होता।

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