भोपाल,26 जून, राज्य शासन द्वारा मुख्यमंत्री तीर्थ-दर्शन योजना संबंधी विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिये गये हैं.

धार्मिक न्यास और धर्मस्व विभाग द्वारा जारी इन दिशा निर्देशों के अनुसार प्रदेश के 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को उनके जीवन काल में एक बार प्रदेश के बाहर के निर्धारित तीर्थ-स्थानों में से किसी एक स्थान की यात्रा के लिए राज्य सरकार सहायता देगी. प्रथमत: आई.आर.सी.टी.सी. (रेलवे) के पैकेज के अनुसार  यात्रियों को भेजा जाएगा. तीर्थ यात्री 60 वर्ष से अधिक आयु का एवं मध्यप्रदेश का मूल निवासी होगा. उसे आयकर दाता नहीं होना चाहिए. साथ ही उसने तीर्थ दर्शन योजना का पूर्व में लाभ नहीं लिया हो. तीर्थ यात्री को यात्रा के लिए शारीरिक एवं मानसिक रूप से सक्षम होना चाहिए. तीर्थ यात्री को किसी भी संक्रामक रोग जैसे टी.बी., ह्रदय रोग, श्वास में अवरोध एवं संक्रामक कुष्ठ आदि से पीडि़त नहीं होना चाहिए. आवेदन में सही जानकारी नहीं देने पर किसी भी समय यात्री को योजना के लाभ से वंचित किया जा सकेगा.

आवेदन प्रक्रिया

तीर्थ-दर्शन योजना का लाभ लेने के इच्छुक वरिष्ठ नागरिकों को अपना आवेदन दो प्रतियों में निर्धारित प्रपत्र में भरकर निकटतम तहसील या उप तहसील में निर्धारित समय-सीमा के पहले जमा करना होगा. आवेदक को आवेदन के साथ फोटो और निवास का साक्ष्य भी लगाना होगा. निवास के साक्ष्य के रूप में राशन कार्ड, ड्रायविंग लाइसेंस, बिजली बिल, मतदाता पहचान-पत्र या राज्य सरकार द्वारा स्वीकार्य कोई अन्य साक्ष्य लगाना होगा.योजना में 65 वर्ष से अधिक उम्र के यात्री के साथ एक सहायक भी जा सकेगा. सहायक की उम्र 18 से 50 वर्ष के बीच होनी चाहिए. पति-पत्नी के साथ यात्रा करने पर सहायक ले जाने की सुविधा नहीं रहेगी. आवेदक पति-पत्नी में से किसी एक का नाम चुना जाता है.

तो उसका जीवन साथी भी यात्रा पर जा सकेगा. जीवन साथी की आयु 60 वर्ष से कम होने पर भी वह यात्रा कर सकेगा. जीवन साथी का आवेदन भी साथ में ही देना होगा. इसी प्रकार सहायक का आवेदन भी आवेदक के साथ ही जमा किया जाएगा. योजना का लाभ लेने के लिए यदि वरिष्ठ नागरिक समूह में आवेदन करते हैं, तो संपूर्ण समूह को एक आवेदन मानते हुए लाटरी में सम्मिलित किया जाएगा. एक समूह में अधिक से अधिक 25 आवेदक हो सकते हैं. इनमें सहायक भी शामिल होगा.

चयन-प्रक्रिया

तीर्थ यात्रियों का चयन कलेक्टर द्वारा किया जाएगा. सबसे पहले प्राप्त आवेदनों को स्थानवार छाँटा जाएगा. यदि निर्धारित कोटे से अधिक संख्या में आवेदन प्राप्त होते हैं, तो लाटरी द्वारा तीर्थ यात्रियों का चयन किया जाएगा. कोटे से 10 प्रतिशत अतिरिक्त व्यक्तियों की प्रतीक्षा सूची भी बनायी जाएगी. ऐसे तीर्थ यात्री जो यात्रा के दौरान शासन द्वारा निर्धारित सुविधाओं के अतिरिक्त सुविधाएँ प्राप्त करना चाहते हैं तो उसका भुगतान उन्हें स्वयं करना होगा. यात्रा के दौरान किसी तरह के ज्वलनशील पदार्थ एवं मादक पदार्थ और आभूषण ले जाने की अनुमति नहीं रहेगी. यात्रा के दौरान किसी दुर्घटना के लिए राज्य शासन उत्तरदायी नहीं रहेगा.

तीर्थ-स्थान

तीर्थ दर्शन योजना में राज्य शासन ने वर्तमान में श्री बद्रीनाथ, श्री केदारनाथ, श्री जगन्नाथपुरी, श्री द्वारकापुरी, हरिद्वार, अमरनाथ, वैष्णोदेवी, शिरडी, तिरूपति, अजमेर शरीफ, काशी, गया, अमृतसर, रामेश्वरम, सम्मेद शिखर, श्रवण बेलगोला और बेलांगणी चर्च, नागापट्टनम तीर्थ को शामिल किया है.

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