विपक्ष ने की संसद ठप, पीएम से मांगा इस्तीफा

नई दिल्ली, 21 अगस्त.  कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितताओं को लेकर विपक्ष ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के इस्तीफे की मांग करते हुए भारी हंगामा किया, जिससे दोनों ही सदनों की बैठक एक बार के स्थगन के बाद दिन भर के लिए स्थगित करनी पडी.

हंगामे के कारण दोनों ही सदनों में न तो प्रश्नकाल हो सका और न ही कोई अन्य विधायी कार्य. लोकसभा में सुबह कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा की अगुवाई वाले राजग और वाम दलों समेत समूचे विपक्ष ने कोयला आवंटन में कथित अनियमितताओं संबंधी भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट का मामला उठाया. विपक्षी सदस्यों ने दलील दी कि जिस समय ये अनियमितता हुई, प्रधानमंत्री के पास ही कोयला मंत्रालय था, इसलिए उन्हें फौरन इस्तीफा देना चाहिए. भाजपा और अन्नाद्रमुक के सदस्य प्रधानमंत्री इस्तीफा दो” के नारे लगाते हुए आसन के समक्ष आ गए. अध्यक्ष मीरा कुमार ने स्थिति शांत नहीं होते देख कुछ ही मिनट बाद बैठक दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी. बैठक शुरू होने पर भी यही नजारा रहा. विपक्षी सदस्य आसन के समक्ष आकर नारेबाजी करते रहे. इसी हंगामे के बीच अध्यक्ष ने आवश्यक दस्तावेज सदन पटल पर रखवाए. अध्यक्ष ने सदस्यों को शांत करने का प्रयास करते हुए कहा कि यदि सदन चाहे तो इस विषय पर चर्चा हो सकती है.

सदन के नेता और गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे ने भी कहा कि इस मुद्दे पर किसी प्रकार की चर्चा पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है लेकिन विपक्षी सदस्यों पर उनकी अपील का कोई असर नहीं हुआ और नारेबाजी जारी रही. हंगामा थमते न देख मीरा कुमार ने बैठक करीब सवा 12 बजे दिनभर के लिए स्थगित कर दी. उधर राज्यसभा में भी इसी मुद्दे पर विपक्ष ने जमकर हंगामा किया. सदन की बैठक शुरू होते ही भाजपा, जदयू, अन्नाद्रमुक, वाम दलों के सदस्यों ने अपने स्थानों पर खड़े होकर कोयला आवंटन से जुड़ा मामला उठाना शुरू कर दिया. भाजपा के कुछ सदस्यों ने प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग करते हुए नारे लगाये. अन्नाद्रमुक और जदयू सदस्य सीएजी रिपोर्ट की प्रति सदन में दिखाने लगे. सभापति ने उन्हें ऐसा नहीं करने के लिए आगाह किया. हंगामे के बीच ही नरेश अग्रवाल सहित सपा के कई सदस्य कोई अन्य मुद्दा उठाने का प्रयास करने लगे. हंगामे के कारण उनकी बात नहीं सुनी जा सकी. सभापति ने विपक्षी सदस्यों से कहा कि उनमें से कोई एक अपनी बात को सदन में रखे.

यदि सब एक साथ बोलेंगे तो कुछ भी नहीं समझ में आयेगा. लेकिन उनकी इस अपील का कोई असर नहीं हुआ. हंगामा थमते न देख सभापति ने बैठक को शुरू होने के महज पांच मिनट बाद ही दोपहर बारह बजे तक स्थगित कर दिया. बैठक शुरू होने पर कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य पी.जे. कुरियन को सर्वसम्मति से सदन का उपसभापति चुना गया. सभापति ने कुरियन के सर्वसम्मति से निर्वाचित होने की घोषणा की. इसके बाद सभापति, प्रधानमंत्री, नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली सहित सभी दलों के नेताओं ने कुरियन को बधाई दी. इसके बाद जैसे ही सभापति ने कुरियन को सदन की कार्यवाही चलाने के लिए आसन पर आमंत्रित किया, विपक्षी सदस्यों ने हंगामा शुरू कर दिया. हंगामा जारी रहने पर कुरियन ने करीब दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर बैठक पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी.

सरकार चर्चा को तैयार : मनमोहन

कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट पर संसद के दोनों सदनों में कामकाज ठप होने के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने आज कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार है और इससे जुड़े सभी आयामों पर संतोषजनक उत्तर दे सकती है। सिंह ने संसद भवन परिसर में संवाददाताओं से कहा  हम चर्चा कराने को तैयार हैं। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘हम इस विषय में उठाये जाने वाले सभी मुद्दों का संतोषप्रद उत्तर दे सकते हैं।ÓÓ कोयला ब्लाक आवंटन में कथित अनियमितता का उल्लेख करते हुए कैग ने अपनी रिपोर्ट में बिना नीलामी के ब्लाकों का आवंटन किये जाने के कारण 1.86 लाख करोड़ रूपये के नुकसान का अनुमान व्यक्त किया है।

पीएम के इस्तीफे की मांग पर अडिग है भाजपा

कोयला ब्लाक आवंटन के मुद्दे पर संसद को ठप करने के बाद भाजपा ने आज कहा कि वह इस मामले में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की अपनी मांग पर डटी रहेगी.  राष्ट्रीय प्रवक्ता रविशंकर प्रसाद ने कहा कि कोयला घोटाला अकेला मुद्दा नहीं है पिछले तीन-चार वर्षों से तरह तरह के भ्रष्टाचार सिलसिलेवार हो रहे हैं. टू जी स्पेक्ट्रम,  राष्ट्रमंडल खेल और आदर्श सोसाइटी के बाद अब कोयला घोटाला सामने आया है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह किसी भी घोटाले की जांच के मामले में गंभीर नहीं हैं. कोयला घोटाले में तो वह सीधे ही जिम्मेदार हैं इसलिए भाजपा ने उनका इस्तीफा मांगा है और वह इस मांग पर डटी रहेगी.  इस मामले पर  राजग की बैठक हुई है और सभी घटक दलों में इस मांग को लेकर सहमति है. यह पूछे जाने पर कि यदि प्रधानमंत्री इस्तीफा नहीं देते हैं तो विपक्ष की क्या रणनीति होगी उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने पूर्व संचार मंत्री ए राजा का इस्तीफा विपक्ष की मांग के बाद ही लिया था.

पीएम का इस्तीफा मांगना भाजपा का चलन हो गया है-सरकार

संसद में विपक्षी दलों द्वारा आज कैग की रिपोर्ट पर किए गए हंगामे को गलत ठहराते हुए सरकार ने कहा है कि वह हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है. लेकिन इसके लिए पहले विपक्ष को लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बातों को रखना व चर्चा के लिए तैयार होना होगा. प्रधानमंत्री मनमनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार इस विषय पर चर्चा कराने को तैयार है और इससे जुड़े सभी बिंदुओं पर संतोषजनक उत्तर दे सकती है. सरकार ने विपक्ष की ओर से प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को खारिज करते हुए कहा कि भाजपा को सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाने की जरूरत है. संसदीय मामलों के मंत्री पवन कुमार बंसल ने कहा कि लोकसभा में जिस तरह से विपक्षी दलों के सदस्यों ने हंगामा किया वह लोकतांत्रिक तरीके से सही नहीं कहा जा सकता. उन्होंने कहा कि जब सरकार चर्चा के लिए तैयार है तो हंगामें व इस्तीफे की मांग का कोई औचित्य नहीं है.

उन्होंने कहा कि विपक्ष को शोर-शराबे व हंगामें की जगह चर्चा करनी चाहिए. चर्चा के लिए सरकार हर वक्त तैयार है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री स्वयं जवाब देने की बात कह चुके हैं ऐसे में सदन की कार्यवाही को बाधित करना सही नहीं है. सूचना एवं प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने भी कहा कि भाजपा बिना किसी सुबूत के प्रधानमंत्री से इस्तीफे की मांग कर रही है. उन्होंने कहा कि यह पहली बार नहीं है जब भाजपा प्रधानमंत्री से इस्तीफा मांग रही है, संसद के हर सत्र में इस प्रकार की मांग करना उसका चलन हो गया है. गौरतलब है कि आज सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने कैग की रिपोर्ट को लेकर प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर हंगामा शुरू कर दिया. जिसके बाद लोकसभा की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई.

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