केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में हुए निर्णय

नई दिल्ली, 09 फरवरी, नससे. केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने देश में फल फूल और सब्जियों का भंडारण करने के उद्देश्य से राष्ट्रीय शीत गृह विकास केंद्र (कोल्ड चेन) के पंजीकरण को आज मंजूरी दे दी.

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में यहां हुई मंत्रिमंडल की बैठक में इस केंद्र का पंजीकरण करने की मंजूरी दी गई जो सरकारी और निजी भागीदारी के साथ काम करेगा और इसकी 22 सदस्यीय संचालन परिषद होगी जिसमे भारतीय उद्योग परिसंघ भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल के प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे. इस केंद्र की स्थापना के लिये 25 करोड़ रूपये की निश्चित राशि भी आवंटित की जायेगी. देश में 715 लाख मीट्रिक टन फल,1337 लाख मीट्रिक टन सब्जी,178 लाख मीट्रिक टन फूल मसाला नारियल काजू मशरूम शहद जैसी वस्तुओं का उत्पादन होता है जिनमे से कई भंडारण की व्यवस्थ नही होने के कारण सड़ जाते हैं. सरकार ने इस समस्या से निपटने के लिये शीत गृह बनाने के उपाय सुझाने के लिये वर्ष 2008 में कार्यबल गठित किया था जिसने देश में बड़ी संख्या में शीत गृहों बनाने का सुझाव दिया था.

रुकेगी 50 करोड़ की बर्बादी

भारत फल, सब्जी, फूल, मसाले, नारियल, मशरूम और शहद आदि जैसे बागबानी के पैदावार में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है. लेकिन शीतघरों की कमी के चलते हर साल 50 हजार करोड़ रुपये मूल्य के उसके ऐसे उत्पाद नष्ट हो जाते हैं. देश में प्रति वर्ष 7.15 करोड़ टन फल, 13.37 करोड़ टन सब्जी तथा 1.78 करोड़ टन फूल आदि की पैदावार होती है. बर्बादी का आंकलन करने और उसे दूर करने के उपाय सुझाने के लिए सरकार ने कोल्ड चेन विकास पर कार्य बल का गठन किया था. इस कार्य बल ने कोल्ड चेन के विकास के लिए समर्पित संस्थान बनाने की सिफारिश की थी.

आंकड़ा सहभाजन नीति को मंजूरी

सरकार ने अपने आंकडों और सूचनाओं को सार्वजनिक करने के बारे में एक व्यापक नीति को आज मंजूरी दे दी. मंत्रिमंडल की  बैठक में राष्ट्रीय आंकडा सहभाजन एवं अभिगम्यता नीति, एन डी एस ए पी. 2012 को मंजूर कर लिया गया. एन डी एस ए पी का मकसद केन्द्र सरकार के आंकडों और सूचनाओं तक पहुंच को बढावा देना है. यह नीति केन्द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों, विभागों- संगठनों, एजेंसियों और स्वायत्त संस्थाओं के उन आंकड़ों और सूचनाओं से संबंधित है. जिन्हें सरकारी खर्च से एकत्र किया गया हो. इस नीति के तहत सार्वजनिक किए जाने लायक सरकारी आंकडों और सूचनाओं को एक नेटवर्क के जरिए देश के विभिन्न भागों में उपलब्ध कराया जाएगा. आंकड़ों और सूचनाओं का यह प्रवाह विभिन्न सरकारी नीतियों. कानूनों और नियमों के तहत होगा.

Related Posts: