मध्यप्रदेश में ठंड का मौसम इन दिनों उतार-चढ़ाव का चल रहा है. दिसंबर तक जितनी तेज ठंड पडऩी चाहिए थी अभी उतनी नहीं पड़ी है. दिसंबर-जनवरी में मावठा की वर्षा भी होती है. जिसे किसान फसलों के लिये सोना बरसना कहते हैं. अभी खेतों में नमी की कमी महसूस की जा रही है और सिंचाई की जरूरत है.

मध्यप्रदेश के कुछ जिलों में अभी से भूजल स्तर गिरने के समाचार भी आ गये. खेती और मौसम यदि दोनों के क्रम में जरा सा भी परिवर्तन होता है तो अनुकूल या प्रतिकूल की स्थिति फौरन बन जाती है. पिछले साल तो यह हाल था कि सर्दी इतनी पड़ गई कि राज्य में ऐसा पाला पड़ा कि उत्तरी जिलों में फसलें ठंड से जल गई और राज्य व केंद्र सरकार को करोड़ों का मुआवजा किसानों को देना पड़ा. मौसम विभाग के अनुसार उत्तर से हवाओं का आना जारी है और आने वाले दिनों में ठंड बढ़ेगी. पिछले तीन दिन से पारा स्थिर बना हुआ है. जम्मू काश्मीर पर छाये बादल अब पूर्व की ओर बढऩे लगे है. इससे ठंड में और इजाफा होगा. राज्य में फसले सभी जगहों पर भरपूर बोई जा चुकी है और इस समय मौसम के अनुकूल ही ठंड और मावठे की वर्षा का इंतजार हो रहा है. कभी-कभी मौसम में जरा सा बदलाव खेती की बड़ी से बड़ी तैयारी और मेहनत को बेकार कर देता है. जोखिम व्यापार से ज्यादा खेती पर होता है.

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