नई दिल्ली, 20 फरवरी.  आचार संहिता उल्लंघन पर घिरे केंद्रीय मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा अब चुनाव आयोग के सम्मान की बात भले ही कर रहे हो, चुनाव आयोग संतुष्ट नहीं है।

खासतौर पर बेनी ने जनसभा में जिस लहजे में आयोग के नोटिस भेजने पर देखने की बात कही थी, वह नागवार गुजरा है। आयोग की ओर से बेनी के बयान की भर्त्सना तो तय है। माना जा रहा है कि कुछ कठोर कदम भी उठाए जा सकते हैं। वह कठोर कदम क्या होगा, यह व्यापक चर्चा के बाद ही तय होगा। वैसे केंद्रीय कानून मंत्री सलमान खुर्शीद के मामले में आयोग ने राष्ट्रपति तक से शिकायत कर दी थी। बेनी ने सोमवार को कांग्रेस प्रवक्ता एवं कानूनविद अभिषेक मनु सिंघवी से चर्चा के बाद आयोग को अपना स्पष्टीकरण भेज दिया है। एक संक्षिप्त जवाब में बेनी ने सफाई दी है कि वह खुद कानून का निष्ठापूर्वक पालन करने वालों में हैं। चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्थाओं के प्रति उनकी पूरी श्रद्धा है। मुस्लिम आरक्षण पर दिया गया बयान कांग्रेस की मंशा से जुड़ा है। लिहाजा चुनाव प्रचार में यह उनकी जुबान पर आ गई। वह जानबूझकर आयोग को ठेस पहुंचाना नहीं चाहते थे। ध्यान रहे कि खुर्शीद ने भी कुछ इसी तरह की सफाई दी थी जिसे आयोग ने खारिज कर दिया था। सूत्र बताते हैं कि बेनी को किसी भी तरह आचार संहिता उल्लंघन के आरोप से बरी नहीं किया जा सकता है। भाषण की सीडी देखने के बाद अपने नोटिस में ही आयोग ने उन्हें आरोपी करार दे दिया है।

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