रिश्वत लेते धराए डीएसपी अजाक

कटनी, 14 मई, नभाप्र. लोकायुक्त पुलिस जबलपुर ने आज एक बड़ी कार्रवाई करते हुए माधव नगर थानांतर्गत स्थित मानसरोवर कॉलोनी के पास अजाक थाने के डीएसपी आर.डी. उइके और उनके ड्रायवर को 15 हजार रूपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया. लोकायुक्त पुलिस की इस कार्रवाई से जिले के पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया. पिछले तीन महीने के दौरान लोकायुक्त पुलिस के छापे की यह तीसरी कार्यवाही थी. डीएसपी अजाक ने मारपीट के एक मामले में युवक से 70 हजार रूपए रिश्वत की मांग की थी और पहली किस्त के रूप में आज 15 हजार रूपए दिए जाना थे, जैसे ही डीएसपी और उनके ड्रायवर ने रूपए लिए वैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने उन्हें रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया.

हासिल जानकारी के मुताबिक रामदयाल विश्वकर्मा के खिलाफ मारपीट के एक मामले की  शिकायत की जांच अजाक डीएसपी आर.डी. उइके द्वारा की जा रही थी. जांच के दौरान अजाक डीएसपी ने रामदयाल विश्वकर्मा से मामला दर्ज नहीं करने के लिए 70 हजार रूपए की रिश्वत मांगी. इतनी बड़ी रकम रामदयाल के लिए दे पाना मुश्किल था. जिस पर उसने कुछ दिनों की मोहलत मांगी. इस दौरान डीएसपी श्री उइके का ड्रायवर रामचंद्र केवट रामदयाल विश्वकर्मा के लगातार संपर्क में रहा और रूपए की मांग करता रहा. बताया जाता है कि डीएसपी अजाक द्वारा मांगी जा रही रिश्वत से परेशान होकर रामदयाल विश्वकर्मा ने लोकायुक्त पुलिस जबलपुर से शिकायत कर दी.

लोकायुक्त पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लिया और जांच शुरू की.
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पहले कराया फोन टेप
लोकायुक्त निरीक्षक प्रभात शुक्ला ने बताया कि रामदयाल विश्वकर्मा द्वारा दी गई शिकायत के आधार पर डीएसपी अजाक का फोन टेप कराया गया. रामदयाल ने डीएसपी को फोन लगाया तो डीएसपी अजाक श्री उइके ने मामले को रफा-दफा करने के लिए 70 रूपए की रिश्वत मांगी और 15 हजार रूपए की पहली रिश्वत आज दिए जाने की बात हुई. श्री शुक्ला ने बताया कि डीएसपी का फोन टेप होने के बाद लोकायुक्त पुलिस द्वारा डीएसपी को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने की योजना बनाई गई. योजना के अनुसार रिश्वत की पहली किस्त 15 हजार रूपए आज अमीरगंज रोड पर मानसरोवर कालोनी के सामने एक किराना दुकान में दी जाना थी.
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हाथ धुलवाते ही छूटा रंग
लोकायुक्त डीएसपी एन.एस. धुर्वे के निर्देशन में लोकायुक्त निरीक्षक प्रभात शुक्ला, मधुरेश पचौरी, शैलेन्द्र गोविन्द, जाहर सिंह, रविन्द्र सिंह व मुन्ना सहित अन्य स्टाफ आज कटनी पहुंचा और निर्धारित स्थान पर घेराबंदी कर दी. बताया जाता है कि रामदयाल विश्वकर्मा ने किराना की दुकान पहुंचकर फोन लगाया. थोड़ी देर बाद डीएसपी आर.डी. उइके और ड्रायवर रामचंद्र केवट वहां पहुंचे और आवेदक रामदयाल विश्वकर्मा से 15 हजार रूपए लिए. जैसे ही रामदयाल विश्वकर्मा ने रूपए डीएसपी अजाक के हाथ पर रखे, वैसे ही लोकायुक्त पुलिस ने डीएसपी और ड्रायवर को रूपए सहित गिरफ्तार कर लिया. दोनों के हाथ धुलवाए गए तो उनके हाथ से रंग छूट पड़ा. रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़े जाने के बाद लोकायुक्त पुलिस ने किराना की दुकान में ही बैठकर पूरी कार्रवाई की. डीएसपी और उनके ड्रायवर के विरूद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है. इस कार्रवाई के बाद उनकी संपत्ति की भी जांच की जाएगी. बता दें, पिछले दो महीने के दौरान लोकायुक्त की यह तीसरी कार्रवाई है. इसके पहले लोकायुक्त पुलिस ने कृषि उपज मंडी में दबिश देकर मंडी सचिव एम.पी. पाल व मुख्य लिपिक चंद्रशेखर अग्रिहोत्री को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया था. इसके बाद ढ़ीमरखेड़ा तहसील के अंतर्गत एक कर्मचारी रिश्वत लेते पकड़ा गया.

आयकर आयुक्त को सजा पैंतीस लाख का जुर्माना भी

भोपाल, 14 मई, विधि सं. विशेष अपर सत्र न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने आज आय से अधिक सम्पत्ति रखने के आरोप में मुंबई के असिस्टेंट कमिश्नर सुरेश कुमार सोनी को तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ पैंतीस लाख रुपये के जुर्माने की सजा से दंडित किया है.

अभियोजन पक्ष के अनुसार आरोपी सुरेश कुमार सोनी वर्ष 1993 से सितंबर 1999 तक भोपाल में इनकम टैक्स अधिकारी के पद पर पदस्थ था. इस दौरान आरोपी की आय से अधिक सम्पत्ति होने की सूचना सीबीआई को मिली थी. सीबीआई ने आरोपी की सम्पत्ति की जांच की तो वह आय से अधिक 36 लाख 87 हजार 451 रुपये की पाई गई. सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ जांच चालान अदालत में पेश किया. अभियोजन पक्ष ने मामले में अपने 42 गवाहों को अदालत में पेश किया था तो आरोपी ने बचाव पक्ष में कुल 18 गवाह पेश किये थे. दोनों पक्षों की गवाही के बाद न्यायाधीश ने आरोपी को भ्रष्टïाचार के आरोप में दोषी पाया. फैसले के दौरान आरोपी को न्यायाधीश राजीव कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने तीन वर्ष के कठोर कारावास के साथ पैंतीस लाख रुपये के जुर्माने से दंडित किया है.

सीबीआई ने जब्त किए इंजीनियरिंग कॉलेजों के दस्तावेज

भोपाल 14 मई नभासं. इंजीनियरिंग कॉलेजों को संबद्धता देने के बदले रिश्वत मामले में सोमवार को सीबीआई ने एआईसीटीई के ऑफिस से इंजीनियरिंग कॉलेजों के दस्तावेज जब्त किए हैं. जब्त करने की कार्रवाई करीब आठ घंटे तक चली है. इन दस्तावेज के परीक्षण के बाद इंजीनियरिंग कॉलेज संचालकों और एक्सपर्ट पैनल के सदस्यों से पूछताछ की जाएगी. भिलाई से रविवार को भोपाल पहुंची सीबीआई की पांच सदस्यीय टीम सोमवार को सुबह ग्यारह बजे एआईसीटीई श्यामला हिल्स स्थित सेंट्रल जोन ऑफिस पहुंची. टीम का नेतृत्व कर रहे इंस्पेक्टर एसके सिन्हा ने बताया कि गिरफ्तार प्रोफेसर संजय सोनी सहित एआईसीटीई के निलंबित आरओ पीएम मिश्रा के लॉकर मंगलवार सुबह खोले जाएंगे. इंजीनियरिंग कालेजों से रिश्वत लेकर संबद्धता देने के मामले में एआईसीटीई के रीजनल ऑफिसर

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